Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 111

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- सौभरि: काण्व: Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
भ꣣द्रो꣡ नो꣢ अ꣣ग्नि꣡राहु꣢꣯तो भ꣣द्रा꣢ रा꣣तिः꣡ सु꣢भग भ꣣द्रो꣡ अ꣢ध्व꣣रः꣢ । भ꣣द्रा꣢ उ꣣त꣡ प्रश꣢꣯स्तयः ॥१११॥

भ꣣द्रः꣢ । नः꣣ । अग्निः꣢ । आ꣡हु꣢꣯तः । आ । हु꣣तः । भद्रा꣢ । रा꣣तिः꣢ । सु꣢भग । सु । भग । भद्रः꣢ । अ꣣ध्वरः꣢ । भ꣣द्राः꣢ । उ꣣त꣢ । प्र꣡श꣢꣯स्तयः । प्र । श꣣स्तयः ॥१११॥

Mantra without Swara
भद्रो नो अग्निराहुतो भद्रा रातिः सुभग भद्रो अध्वरः । भद्रा उत प्रशस्तयः ॥

भद्रः । नः । अग्निः । आहुतः । आ । हुतः । भद्रा । रातिः । सुभग । सु । भग । भद्रः । अध्वरः । भद्राः । उत । प्रशस्तयः । प्र । शस्तयः ॥१११॥

Samveda - Mantra Number : 111
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 12;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सुभग) हे शोभन ऐश्वर्यवन्! (अग्निः-आहुतः-नः-भद्रः) तू ज्योतिःस्वरूप परमात्मा हमारे द्वारा समन्तरूप से गृहीत हुआ—ध्याया हुआ हमारे लिये कल्याणकारी हो (रातिः-भद्रा) तेरी दानधारा हमारे लिये कल्याणकारी हो उसकी प्राप्ति और उपयोग कल्याण करे “ते पूषन्निह रातिरस्तु-पूषन्निदत्तिरस्तु” [निरु॰ १२.१७] (अध्वरः-भद्रः) यज्ञ कल्याणकारी हो (उत प्रशस्तयः-भद्राः) तेरे लिये की गई गुणगान स्तुतियाँ भी कल्याणकारी हों—फलदायक हों।
Essence
महैश्वर्यवान् ज्योतिःस्वरूप परमात्मा सम्यक् ध्याया हुआ कल्याण-कारी होता है उसका दान भी कल्याण साधने वाला, यज्ञ उसका आदिष्ट श्रेष्ठकर्म कल्याणकर हो और उसकी विविध गुणगान—स्तुतियाँ भी कल्याणकारी हैं॥५॥
Special
ऋषिः—सौभरिः कण्वः (परमात्माग्नि को अपने अन्दर भरण धारण करने में कुशल मेधावी जन)॥