Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1085

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ꣢ घ꣣ त्वा꣢वान्꣣ त्म꣡ना꣢ यु꣣क्तः꣢ स्तो꣣तृ꣡भ्यो꣢ धृष्णवीया꣣नः꣢ । ऋ꣣णो꣢꣫रक्षं꣣ न꣢ च꣣꣬क्र्योः꣢꣯ ॥१०८५॥

आ । घ꣣ । त्वा꣡वा꣢꣯न् । त्म꣡ना꣢꣯ । यु꣣क्तः꣢ । स्तो꣣तृ꣡भ्यः꣢ । धृ꣣ष्णो । ईयानः꣢ । ऋ꣣णोः꣢ । अ꣡क्ष꣢꣯म् । न । च꣣क्र्योः꣢ ॥१०८५॥

Mantra without Swara
आ घ त्वावान् त्मना युक्तः स्तोतृभ्यो धृष्णवीयानः । ऋणोरक्षं न चक्र्योः ॥

आ । घ । त्वावान् । त्मना । युक्तः । स्तोतृभ्यः । धृष्णो । ईयानः । ऋणोः । अक्षम् । न । चक्र्योः ॥१०८५॥

Samveda - Mantra Number : 1085
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(धृष्णो) हे काम आदि दोषों के धर्षक—धकेलनेवाले इन्द्र—ऐश्वर्यवन् परमात्मन्! (त्वावान् घ) तुझ जैसा*69 तू ही है (स्तोतृभ्यः-ईयानः) स्तुतिकर्ताओं द्वारा प्रार्थ्यमान—प्रार्थना किया जाता हुआ उनके लिए उनके साथ (त्मना युक्तः) अपने स्वरूप से युक्त हुआ (चक्र्योः-अक्षं न) रथ के पहियों में अक्ष—धुरा दण्ड के समान (आ-ऋणोः) समन्तरूप से उन्हें गति दे*70 मोक्ष की ओर ले जा॥२॥
Footnote
[*69. “युष्मदस्मद्भ्यां छन्दसि सादृश्य उपसंख्यानम्” [अष्टा॰ ५.२.९४ वा॰] इति मतुप्।] [*70. “ऋणोति गतिकर्मा” [निघं॰ २.१४]।]
Special