Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1069

1875 Mantra
Devata- आदित्याः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ते꣡ स्या꣢म देव वरुण꣣ ते꣡ मि꣢त्र सू꣣रि꣡भिः꣢ स꣣ह꣢ । इ꣢ष꣣꣬ꣳ स्व꣢꣯श्च धीमहि ॥१०६९॥

ते꣢ । स्या꣣म । देव । वरुण । ते꣢ । मि꣣त्र । मि । त्र । सूरि꣡भिः꣢ । स꣣ह꣢ । इ꣡ष꣢꣯म् । स्वऽ३रि꣡ति꣢ । च꣣ । धीमहि ॥१०६९॥

Mantra without Swara
ते स्याम देव वरुण ते मित्र सूरिभिः सह । इषꣳ स्वश्च धीमहि ॥

ते । स्याम । देव । वरुण । ते । मित्र । मि । त्र । सूरिभिः । सह । इषम् । स्वऽ३रिति । च । धीमहि ॥१०६९॥

Samveda - Mantra Number : 1069
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(देव वरुण ते स्याम) हे अपनी ओर वरनेवाले परमात्मदेव! हम तेरे हों—तुझ से अलग न हों (मित्र ते) हे प्रेरक परमात्मन्! हम तेरे हों—तुझसे अलग न हों (सूरिभिः सह) स्तुतिकर्त्ताओं*46 के साथ हम से पूर्व स्तुतिकर्त्ता जैसे तेरे हो गये उनके साथ हम भी तेरे हो जावें उनकी श्रेणी में तेरे बन जावें?॥३॥
Footnote
[*46. “सूरिः स्तोतृनाम” [निघं॰ ३.१६]।]
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