Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 1000

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वृ꣡षा꣢ पुना꣣न꣡ आयू꣢꣯ꣳषि स्त꣣न꣢य꣣न्न꣡धि꣢ ब꣣र्हि꣡षि꣢ । ह꣢रिः꣣ स꣢꣫न्योनि꣣मा꣡स꣢दः ॥१०००॥

वृ꣡षा꣢꣯ । पु꣣नानः꣢ । आ꣡यू꣢꣯ꣳषि । स्त꣣न꣡य꣢न् । अ꣡धि꣢꣯ । ब꣣र्हि꣡षि꣢ । ह꣡रिः꣢꣯ । सन् । यो꣡नि꣢꣯म् । आ । अ꣣सदः ॥१०००॥

Mantra without Swara
वृषा पुनान आयूꣳषि स्तनयन्नधि बर्हिषि । हरिः सन्योनिमासदः ॥

वृषा । पुनानः । आयूꣳषि । स्तनयन् । अधि । बर्हिषि । हरिः । सन् । योनिम् । आ । असदः ॥१०००॥

Samveda - Mantra Number : 1000
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(वृषा हरिः पुनानः सन्) हे सोम शान्तस्वरूप परमात्मन्! तू कामनावर्षक दुःखापहारी सुखाहारी शोधक होता हुआ (बर्हिष-अधि-आयूंषि स्तनयन्) आयुओं जीवन के दिनों को सारे दिनों में अध्यात्मप्रवचन करता हुआ प्रवृद्ध अन्तःस्थल में (योनिम्-आसदः) हृदय घर में आ विराज॥२॥
Special