Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 936

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣢ सू꣣नु꣢र्मा꣣त꣢रा꣣ शु꣡चि꣢र्जा꣣तो꣢ जा꣣ते꣡ अ꣢रोचयत् । म꣣हा꣢न्म꣣ही꣡ ऋ꣢ता꣣वृ꣡धा꣢ ॥९३६॥

सः꣢ । सू꣣नुः꣢ । मा꣣त꣡रा꣢ । शु꣡चिः꣢꣯ । जा꣣तः꣢ । जा꣣ते꣡इति꣢ । अ꣡रोचयत् । महा꣣न् । म꣢ही꣢इति꣣ । ऋ꣣तावृ꣡धा꣢ । ऋ꣣त । वृ꣡धा꣢꣯ ॥९३६॥

Mantra without Swara
स सूनुर्मातरा शुचिर्जातो जाते अरोचयत् । महान्मही ऋतावृधा ॥

सः । सूनुः । मातरा । शुचिः । जातः । जातेइति । अरोचयत् । महान् । महीइति । ऋतावृधा । ऋत । वृधा ॥९३६॥

Samveda - Mantra Number : 936
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(सः) वह सुयोग्य आचार्य से शिक्षा दिया हुआ, (शुचिः)पवित्र हृदयवाला, (जातः) स्नातक बना हुआ (महान्) गुणों में महान् (सूनुः) पुत्र (जाते) विद्याओं से प्रसिद्ध, (मही) महागुणविशिष्ट, (ऋतावृधा) सत्य को बढ़ानेवाले (मातरा) माता-पिता को (अरोचयत्) यश से प्रदीप्त करता है ॥२॥
Essence
सुयोग्य गुरुओं से पढ़ाया हुआ सुयोग्य पुत्र सुयोग्य माता-पिताओं और सुयोग्य गुरुओं की कीर्ति फैलाता है ॥२॥
Subject
अब आचार्य से पढ़ाया हुआ कैसा पुत्र माता-पिता का यश फैलानेवाला होता है, यह कहते हैं।