Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 780

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अहमीयुराङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
या꣡ ते꣢ भी꣣मा꣡न्यायु꣢꣯धा ति꣣ग्मा꣢नि꣣ स꣢न्ति꣣ धू꣡र्व꣢णे । र꣡क्षा꣢ समस्य नो नि꣣दः꣢ ॥७८०॥

या । ते꣣ । भीमा꣡नि꣢ । आ꣡यु꣢꣯धा । ति꣣ग्मा꣡नि꣢ । स꣡न्ति꣢꣯ । धू꣡र्व꣢꣯णे । र꣡क्ष꣢꣯ । स꣣मस्य । नः । निदः꣢ ॥७८०॥

Mantra without Swara
या ते भीमान्यायुधा तिग्मानि सन्ति धूर्वणे । रक्षा समस्य नो निदः ॥

या । ते । भीमानि । आयुधा । तिग्मानि । सन्ति । धूर्वणे । रक्ष । समस्य । नः । निदः ॥७८०॥

Samveda - Mantra Number : 780
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे पवमान सोम ! हे कर्मशूर जगदीश्वर, आचार्य और राजन् ! (धूर्वणे) हिंसक के लिए (या) जो (ते) आपके (भीमानि) भयंकर, (तिग्मानि) तीक्ष्ण (आयुधा) हथियार (सन्ति) हैं, उनके द्वारा आप (समस्य) सब शत्रुओं से की जानेवाली (निदः) निन्दा से (नः) हमें (रक्ष) बचाइये ॥३॥ यहाँ अर्थश्लेष अलङ्कार है ॥३॥
Essence
जगदीश्वर दण्डशक्तिरूप शस्त्रास्त्रों से, आचार्य ब्रह्मतेजरूप शस्त्रास्त्रों से और राजा भौतिक शस्त्रास्त्रों से दुष्टों की दुष्टता को दूर करके उनसे की जानेवाली निन्दा से मनुष्यों, शिष्यों और प्रजाजनों की रक्षा करें ॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में फिर उन्हीं से प्रार्थना है।