Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 777

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- जमदग्निर्भार्गवः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
तु꣢भ्ये꣣मा꣡ भुव꣢꣯ना कवे महि꣣म्ने꣡ सो꣢म तस्थिरे । तु꣡भ्यं꣢ धावन्ति धे꣣न꣡वः꣢ ॥७७७॥

तु꣡भ्य꣢꣯ । इ꣡मा꣢ । भु꣡व꣢꣯ना । क꣣वे । महिम्ने꣢ । सो꣣म । तस्थिरे । तु꣡भ्य꣢꣯म् । धा꣣वन्ति । धेन꣡वः꣢ ॥७७७॥

Mantra without Swara
तुभ्येमा भुवना कवे महिम्ने सोम तस्थिरे । तुभ्यं धावन्ति धेनवः ॥

तुभ्य । इमा । भुवना । कवे । महिम्ने । सोम । तस्थिरे । तुभ्यम् । धावन्ति । धेनवः ॥७७७॥

Samveda - Mantra Number : 777
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (कवे) मेधावी, दूरदर्शी (सोम) जगदीश्वर ! (इमा भुवना) ये लोक-लोकान्तर (तुभ्य) आपकी ही पूजा के लिए (महिम्ने तस्थिरे) महिमावान् हुए हैं। (तुभ्यम्) आपकी ही पूजा के लिए (धेनवः) गौएँ, मेघ-मालाएँ और सूर्यकिरणें (धावन्ति) दौड़ लगा रही हैं ॥३॥
Essence
इस विशाल ब्रह्माण्ड में सूर्य, चाँद, तारे, भूमि, ऋतुएँ, नदियाँ, समुद्र, मेघ-घटाएँ, गौएँ, घोड़े, मनुष्य, मङ्गल-बुध-बृहस्पति आदि ग्रह सब परमेश्वर की ही महिमा का गान कर रहे हैं ॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में सोम जगदीश्वर की महिमा का वर्णन है।