Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 691

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
व꣣रिवोधा꣡त꣢मो भुवो꣣ म꣡ꣳहि꣢ष्ठो वृत्र꣣ह꣡न्त꣢मः । प꣢र्षि꣣ रा꣡धो꣢ म꣣घो꣡ना꣢म् ॥६९१॥

वरिवोधा꣡त꣢मः । व꣣रिवः । धा꣡त꣢꣯मः । भु꣣वः । म꣡ꣳहि꣢꣯ष्ठः । वृ꣣त्र꣡हन्त꣢मः । वृ꣣त्र । ह꣡न्त꣢꣯मः । प꣡र्षि꣢꣯ । रा꣡धः꣢꣯ । म꣣घो꣡ना꣢म् ॥६९१॥

Mantra without Swara
वरिवोधातमो भुवो मꣳहिष्ठो वृत्रहन्तमः । पर्षि राधो मघोनाम् ॥

वरिवोधातमः । वरिवः । धातमः । भुवः । मꣳहिष्ठः । वृत्रहन्तमः । वृत्र । हन्तमः । पर्षि । राधः । मघोनाम् ॥६९१॥

Samveda - Mantra Number : 691
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे इन्द्र परमात्मन् ! आप (वरिवोधातमः) अतिशय ऐश्वर्य को धारण करनेवाले, (मंहिष्ठः) सबसे बढ़कर दानी, (वृत्रहन्तमः) सबसे बड़े पापहन्ता (भुवः) सिद्ध हुए हो। आप ही (मघोनाम्) हम भौतिक धनों के धनियों को (राधः) सत्य, न्याय, दया, मोक्ष, आदि दिव्य धन (पर्षि) प्रदान करो ॥३॥
Essence
वही मनुष्य वस्तुतः धनी है, जो भौतिक धन के साथ अध्यात्म धन भी कमाता है ॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में परमात्मा से प्रार्थना करते हैं।