Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 642

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- प्रजापतिः Chhand- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
आ꣣भि꣢꣫ष्ट्वम꣣भि꣡ष्टि꣢भिः꣣ स्वा꣢ऽ३र्न्ना꣢ꣳशुः । प्र꣡चे꣢तन꣣ प्र꣡चे꣢त꣣ये꣡न्द्र꣢ द्यु꣣म्ना꣡य꣢ न इ꣣षे꣢ ॥६४२

आ꣣भिः । त्वम् । अभिष्टिभिः । स्वः । न । अँ꣣शुः꣢ । प्र꣡चे꣢꣯तन । प्र । चे꣣तन । प्र꣢ । चे꣣तय । इ꣡न्द्र꣢꣯ । द्यु꣣म्ना꣡य꣢ । नः꣢ । इषे꣢ ॥६४२॥

Mantra without Swara
आभिष्ट्वमभिष्टिभिः स्वाऽ३र्न्नाꣳशुः । प्रचेतन प्रचेतयेन्द्र द्युम्नाय न इषे ॥६४२

आभिः । त्वम् । अभिष्टिभिः । स्वः । न । अँशुः । प्रचेतन । प्र । चेतन । प्र । चेतय । इन्द्र । द्युम्नाय । नः । इषे ॥६४२॥

Samveda - Mantra Number : 642

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे परमात्मन् ! आप (आभिः) इन हमसे माँगी गयी (अभिष्टिभिः) अभीष्ट सिद्धियों से, हमें कृतार्थ कीजिए। आप (स्वः न) सूर्य के समान (अंशुः) अंशुमाली हैं। हे (प्रचेतन) प्रकृष्ट चेतनावाले जागरूक परमेश्वर ! आप हमें (प्रचेतय) प्रकृष्ट चेतनावाला जागरूक बनाइए। हे (इन्द्र) परमैश्वर्यशालिन् ! आप (नः) हमें (द्युम्नाय) धन, यश और तेज के लिए, तथा (इषे) अन्न, रस और विज्ञान के लिए, पुरुषार्थी कीजिए ॥२॥ इस मन्त्र में ‘प्रचेत’ की आवृत्ति में यमक अलङ्कार है ॥२॥
Essence
परमात्मा की संगति से हम अध्यात्म-ज्योति से प्रकाशमान, जागरूक, धनवान्, अन्नवान्, तेजस्वी, यशस्वी और विज्ञानवान् होवें ॥२॥
Subject
परमात्मा की स्तुति से हम क्या-क्या प्राप्त करें, यह कहते हैं।