Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 641

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- प्रजापतिः Chhand- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
वि꣣दा꣡ म꣢घवन् वि꣣दा꣢ गा꣣तु꣢꣯मनु꣢꣯शꣳसिषो꣣ दि꣡शः꣢ । शि꣡क्षा꣢ शचीनां पते पूर्वी꣣णां꣡ पुरू꣢वसो ॥६४१

वि꣣दाः꣢ । म꣣घवन् । विदाः꣢ । गा꣣तु꣢म् । अ꣡नु꣢꣯ । शँ꣣सिषः । दि꣡शः꣢꣯ । शि꣡क्षा꣢꣯ । श꣣चीनाम् । पते । पूर्वीणा꣢म् । पु꣣रूवसो । पुरु । वसो ॥६४१॥

Mantra without Swara
विदा मघवन् विदा गातुमनुशꣳसिषो दिशः । शिक्षा शचीनां पते पूर्वीणां पुरूवसो ॥६४१

विदाः । मघवन् । विदाः । गातुम् । अनु । शँसिषः । दिशः । शिक्षा । शचीनाम् । पते । पूर्वीणाम् । पुरूवसो । पुरु । वसो ॥६४१॥

Samveda - Mantra Number : 641

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (मघवन्) ज्ञानरूप ऐश्वर्य के धनी परमात्मन् ! आप (विदाः) हमें जानिए, (गातुम्) हमारे आचरण को (विदाः) जानिए, (दिशः) गन्तव्य दिशाओं का (अनुशंसिषः) उपदेश कीजिए। हे (शचीनां पते) ज्ञानों और कर्मों के अधिपति ! आप हमें भी (शिक्ष) ज्ञान और कर्म प्रदान कीजिए। हे (पुरुवसो) प्रचुर धनवाले ! आप (पूर्वीणाम्) श्रेष्ठ दानों के स्वामी हैं, हमें भी उन दानों का पात्र बनाइए ॥१॥ इस मन्त्र में अनेक क्रियाओं का एक कारक से योग होने के कारण दीपक अलङ्कार है। ‘विदा’ की आवृत्ति में लाटानुप्रास है। ‘पूर्वी, पुरूव’ में छेकानुप्रास है ॥१॥
Essence
परमात्मा से सब मनुष्यों को कर्तव्यज्ञान और कर्मसम्पति प्राप्त करके, पुरुषार्थ से धन कमा कर सदाचारपूर्वक समृद्ध जीवन बिताना चाहिए ॥१॥
Subject
प्रथम मन्त्र में परमात्मा से मार्गनिर्देशन की प्रार्थना की गयी है।