Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 558

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कविर्भार्गवः Chhand- जगती Swara- निषादः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
ध꣣र्ता꣢ दि꣣वः꣡ प꣢वते꣣ कृ꣢त्व्यो꣣ र꣢सो꣣ द꣡क्षो꣢ दे꣣वा꣡ना꣢मनु꣣मा꣢द्यो꣣ नृ꣡भिः꣢ । ह꣡रिः꣢ सृजा꣣नो꣢꣫ अत्यो꣣ न꣡ सत्व꣢꣯भि꣣र्वृ꣢था꣣ पा꣡जा꣢ꣳसि कृणुषे न꣣दी꣢ष्वा ॥५५८॥

ध꣣र्ता꣢ । दि꣣वः꣢ । प꣣वते । कृ꣡त्व्यः꣢꣯ । र꣡सः꣢꣯ । द꣡क्षः꣢꣯ । दे꣣वा꣡ना꣢म् । अ꣣नुमा꣡द्यः꣢ । अ꣣नु । मा꣡द्यः꣢꣯ । नृ꣡भिः꣢꣯ । ह꣡रिः꣢꣯ । सृ꣣जानः꣢ । अ꣡त्यः꣢꣯ । न । स꣡त्व꣢꣯भिः । वृ꣡था꣢꣯ । पा꣡जाँ꣢꣯सि । कृ꣣णुषे । नदी꣡षु꣢ । आ ॥५५८॥

Mantra without Swara
धर्ता दिवः पवते कृत्व्यो रसो दक्षो देवानामनुमाद्यो नृभिः । हरिः सृजानो अत्यो न सत्वभिर्वृथा पाजाꣳसि कृणुषे नदीष्वा ॥

धर्ता । दिवः । पवते । कृत्व्यः । रसः । दक्षः । देवानाम् । अनुमाद्यः । अनु । माद्यः । नृभिः । हरिः । सृजानः । अत्यः । न । सत्वभिः । वृथा । पाजाँसि । कृणुषे । नदीषु । आ ॥५५८॥

Samveda - Mantra Number : 558
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 9;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(दिवः) द्युलोक अथवा सूर्य का (धर्ता) धारण करनेवाला, (कृत्व्यः) कर्मकुशल, (रसः) आनन्द-रसमय, (देवानाम्) विद्वानों का (दक्षः) बलप्रदाता, (नृभिः) पुरुषार्थी मनुष्यों से (अनुमाद्यः) प्रसन्न किये जाने योग्य परमात्मा (पवते) सब जड़-चेतन जगत् को पवित्र करता है। आगे प्रत्यक्षकृत वर्णन है—(हरिः) आकर्षण के बल से सूर्य, चन्द्र, पृथिवी आदि लोकों के नियामक, (सृजानः) जगत् की रचना करनेवाले आप (वृथा) अनायास ही (सत्वभिः) अपने बलों से (नदीषु) नदियों में (पाजांसि) बलों और वेगों को (आ कृणुषे) स्थापित करते हो, (अत्यः न) जैसे घोड़ा रथ आदि में वेगों को स्थापित करता है ॥५॥ इस मन्त्र में लक्षणावृत्ति से रस का अर्थ रसवान् और दक्ष का अर्थ दक्षकारी है। ‘अत्यो न’ में उपमालङ्कार है ॥५॥
Essence
जो परमेश्वर सारे संसार को रचनेवाला, धारण करनेवाला और बल, वेग आदि देनेवाला है, उसकी सब मनुष्य आराधना क्यों न करें? ॥५॥
Subject
अगले मन्त्र में सोम परमात्मा के कर्मों का वर्णन है।