Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 556

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कविर्भार्गवः Chhand- जगती Swara- निषादः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢꣫ प्र कोशे꣣ म꣡धु꣢माꣳ अचिक्रद꣣दि꣡न्द्र꣢स्य꣣ व꣢ज्रो꣣ व꣡पु꣢षो꣣ व꣡पु꣢ष्टमः । अ꣣भ्यॄ꣢३त꣡स्य꣢ सु꣣दु꣡घा꣢ घृ꣣त꣡श्चुतो꣢ वा꣣श्रा꣡ अ꣢र्षन्ति꣣ प꣡य꣢सा च धे꣣न꣡वः꣢ ॥५५६॥

ए꣣षः꣢ । प्र । को꣡शे꣢꣯ । म꣡धु꣢꣯मान् । अ꣣चिक्रदत् । इ꣡न्द्र꣢꣯स्य । व꣡ज्रः꣢꣯ । व꣡पु꣢꣯षः । व꣡पु꣢꣯ष्टमः । अ꣣भि꣢꣯ । ऋ꣣त꣡स्य꣢ । सु꣣दु꣡घाः꣢ । सु꣣ । दु꣡घाः꣢꣯ । घृ꣣तश्चु꣡तः꣢ । घृ꣣त । श्चु꣡तः꣢꣯ । वा꣣श्राः꣢ । अ꣣र्षन्ति । प꣡य꣢꣯सा । च꣣ । धेन꣡वः꣢ ॥५५६॥

Mantra without Swara
एष प्र कोशे मधुमाꣳ अचिक्रददिन्द्रस्य वज्रो वपुषो वपुष्टमः । अभ्यॄ३तस्य सुदुघा घृतश्चुतो वाश्रा अर्षन्ति पयसा च धेनवः ॥

एषः । प्र । कोशे । मधुमान् । अचिक्रदत् । इन्द्रस्य । वज्रः । वपुषः । वपुष्टमः । अभि । ऋतस्य । सुदुघाः । सु । दुघाः । घृतश्चुतः । घृत । श्चुतः । वाश्राः । अर्षन्ति । पयसा । च । धेनवः ॥५५६॥

Samveda - Mantra Number : 556
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 9;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(एषः) यह (मधुमान्) मधुर परमात्मारूप सोम (कोशे) हमारे मनोमय कोश में (प्र अचिक्रदत्) दिव्य शब्द करा रहा है, जिससे (इन्द्रस्य) जीवात्मा का (वज्रः) काम, क्रोध आदि रिपुओं के वर्जन का सामर्थ्य (वपुषः वपुष्टमः) दीप्त से दीप्ततम अथवा विशाल से विशालतम हो गया है। (वाश्राः) शब्दायमान (धेनवः) वेदवाणी रूप गौएँ (ऋतस्य) सत्य की (सुदुघाः) उत्तम दोहन करनेवाली और (घृतश्चुतः) तेजरूप घी को क्षरित करनेवाली होती हुई (पयसा) वेदार्थरूप दूध के साथ (अभि अर्षन्ति) हमें प्राप्त हो रही हैं ॥३॥ इस मन्त्र में वेदवाणियों में धेनुओं का और वेदार्थ में दूध का आरोप होने से तथा उपमान द्वारा उपमेय का निगरण हो जाने से अतिशयोक्ति अलङ्कार है ॥३॥
Essence
जब वेदवाणी-रूपिणी गौएँ अपना पवित्र और पवित्रताकारी वेदार्थरूप दूध पिलाती हैं, तब उस दूध से मनुष्य का आत्मा सत्यमय, तेजोमय, अतिशय बलवान्, पवित्र और परिपुष्ट हो जाता है ॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में परमात्मा रूप सोम की प्राप्ति का फल वर्णित किया गया है।