Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 549

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अम्बरीषो वार्षागिर ऋजिष्वा भारद्वाजश्च Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣भी꣡ नो꣢ वाज꣣सा꣡त꣢मꣳ र꣣यि꣡म꣢र्ष शत꣣स्पृ꣡ह꣢म् । इ꣡न्दो꣢ स꣣ह꣡स्र꣢भर्णसं तुविद्यु꣣म्नं꣡ वि꣢भा꣣स꣡ह꣢म् ॥५४९॥

अ꣣भि꣢ । नः꣣ । वाजसा꣡त꣢मम् । वा꣣ज । सा꣡त꣢꣯मम् । र꣣यि꣢म् । अ꣣र्ष । शतस्पृ꣡ह꣢म् । श꣣त । स्पृ꣡ह꣢꣯म् । इ꣡न्दो꣢꣯ । स꣣ह꣡स्र꣢भर्णसम् । स꣣ह꣡स्र꣢ । भ꣣र्णसम् । तुविद्युम्न꣢म् । तु꣣वि । द्युम्न꣢म् । वि꣣भास꣡ह꣢म् । वि꣣भा । स꣡ह꣢꣯म् ॥५४९॥

Mantra without Swara
अभी नो वाजसातमꣳ रयिमर्ष शतस्पृहम् । इन्दो सहस्रभर्णसं तुविद्युम्नं विभासहम् ॥

अभि । नः । वाजसातमम् । वाज । सातमम् । रयिम् । अर्ष । शतस्पृहम् । शत । स्पृहम् । इन्दो । सहस्रभर्णसम् । सहस्र । भर्णसम् । तुविद्युम्नम् । तुवि । द्युम्नम् । विभासहम् । विभा । सहम् ॥५४९॥

Samveda - Mantra Number : 549
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 8;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (इन्दो) आनन्दरस से आर्द्र करनेवाले परमात्मन् ! आप (वाजसातमम्) अतिशय बल के प्रदाता, (शतस्पृहम्) बहुतों से स्पृहणीय, (सहस्रभर्णसम्) सहस्र गुणों को धारण करानेवाले अथवा सहस्रों जनों का पोषण करनेवाले, (तुविद्युम्नम्) बहुत यश को देनेवाले, (विभासहम्) शत्रु के प्रताप को अभिभूत करनेवाले (रयिम्) आध्यात्मिक तथा भौतिक ऐश्वर्य को (नः) हमें (अभि अर्ष) प्राप्त कराइए ॥५॥
Essence
परमात्मा की कृपा से और अपने पुरुषार्थ से सब लोग सत्य, अहिंसा, अणिमा, महिमा, लघिमा आदि आध्यात्मिक तथा सोना, चाँदी, मणि, मोती आदि भौतिक धन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे वे आत्मिक और शारीरिक बल, सहस्रों गुण, सहस्रों के पोषण का सामर्थ्य और कीर्ति प्राप्त करने में तथा शत्रु के तेज को परास्त करने में समर्थ हो जाते हैं ॥५॥
Subject
अगले मन्त्र में सोम परमात्मा से धन की प्रार्थना है।