Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 511

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- सप्तर्षयः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
पु꣣नानः꣡ सो꣢म꣣ धा꣡र꣢या꣣पो꣡ वसा꣢꣯नो अर्षसि । आ꣡ र꣢त्न꣣धा꣡ योनि꣢꣯मृ꣣त꣡स्य꣢ सीद꣣स्युत्सो꣢ दे꣣वो꣡ हि꣢र꣣ण्य꣡यः꣢ ॥५११॥

पु꣣नानः꣢ । सो꣣म । धा꣡र꣢꣯या । अ꣣पः꣢ । व꣡सा꣢꣯नः । अ꣣र्षसि । आ꣢ । र꣣त्नधाः꣢ । र꣣त्न । धाः꣢ । यो꣡नि꣢꣯म् । ऋ꣣त꣡स्य꣢ । सी꣣दसि । उ꣡त्सः꣢꣯ । उत् । सः꣣ । देवः꣢ । हि꣣रण्य꣡यः꣢ ॥५११॥

Mantra without Swara
पुनानः सोम धारयापो वसानो अर्षसि । आ रत्नधा योनिमृतस्य सीदस्युत्सो देवो हिरण्ययः ॥

पुनानः । सोम । धारया । अपः । वसानः । अर्षसि । आ । रत्नधाः । रत्न । धाः । योनिम् । ऋतस्य । सीदसि । उत्सः । उत् । सः । देवः । हिरण्ययः ॥५११॥

Samveda - Mantra Number : 511
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (सोम) पवित्र रस के भण्डार परमात्मन् ! आप (धारया) अपनी आनन्द-धारा से (पुनानः) पवित्रता लाते हुए, (अपः) कर्म को (वसानः) आच्छादित अर्थात् प्रभावित करते हुए (अर्षसि) उपासकों के हृदय में व्याप्त होते हो। (रत्नधाः) रमणीय गुणरूप रत्नों के प्रदाता आप (ऋतस्य) सत्य के (योनिम्) गृहरूप जीवात्मा को (आ सीदसि) प्राप्त होते हो। आप (उत्सः) आनन्द के झरने, (देवः) विद्या, सुख आदि के प्रदाता और (हिरण्ययः) ज्योतिर्मय तथा यशोमय हो ॥१॥
Essence
पवित्र परमेश्वर अपने उपासकों के हृदयों और कर्मों को पवित्र करता हुआ, उनके आत्मा में निवास करता हुआ, उन्हें आनन्द के झरने में स्नान कराता हुआ, ज्योति से प्रदीप्त करता हुआ यशस्वी बनाता है ॥१॥
Subject
प्रथम मन्त्र में सोम परमात्मा के गुण-कर्मों का वर्णन है।