Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 45

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
ए꣣ना꣡ वो꣢ अ꣣ग्निं꣡ नम꣢꣯सो꣣र्जो꣡ नपा꣢꣯त꣣मा꣡ हु꣢वे । प्रि꣣यं꣡ चेति꣢꣯ष्ठमर꣣ति꣡ꣳ स्व꣢ध्व꣣रं꣡ विश्व꣢꣯स्य दू꣣त꣢म꣣मृ꣡त꣢म् ॥४५॥

ए꣣ना꣢ । वः꣣ । अग्नि꣢म् । न꣡म꣢꣯सा । ऊ꣣र्जः꣢ । न꣡पा꣢꣯तम् । आ । हु꣣वे । प्रिय꣢म् । चे꣡ति꣢꣯ष्ठम् । अर꣣ति꣢म् । स्व꣣ध्वरम् । सु । अध्वर꣢म् । वि꣡श्व꣢꣯स्य दू꣣त꣢म् । अ꣣मृ꣡त꣢म् । अ꣣ । मृ꣡त꣢꣯म् ॥४५॥

Mantra without Swara
एना वो अग्निं नमसोर्जो नपातमा हुवे । प्रियं चेतिष्ठमरतिꣳ स्वध्वरं विश्वस्य दूतममृतम् ॥

एना । वः । अग्निम् । नमसा । ऊर्जः । नपातम् । आ । हुवे । प्रियम् । चेतिष्ठम् । अरतिम् । स्वध्वरम् । सु । अध्वरम् । विश्वस्य दूतम् । अमृतम् । अ । मृतम् ॥४५॥

Samveda - Mantra Number : 45
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
मैं (एना) इस (नमसा) नमस्कार द्वारा (ऊर्जः नपातम्) बल एवं प्राणशक्ति के पुत्र अर्थात् अतिशय बलवान् और प्राणवान् (प्रियम्) प्रिय, (चेतिष्ठम्) सबसे अधिक ज्ञानी और ज्ञानप्रदाता, (अरतिम्) सर्वव्यापक वा सुखप्रापक, (स्वध्वरम्) उत्कृष्ट, अहिंसामय सृष्टिसंचालन-रूप यज्ञ के कर्ता, (विश्वस्य) सबके (दूतम्) दुःख, दोष आदि को दूर करनेवाले, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्राप्त करानेवाले तथा काम-क्रोधादि शत्रुओं को उपतप्त करनेवाले, (अमृतम्) स्वरूप से नाश-रहित (वः) आप (अग्निम्) परमात्मा को (आहुवे) पुकारता हूँ ॥१॥
Essence
जो परमात्मा बल और प्राण का खजाना, भक्तवत्सल, पूर्णज्ञानी, सर्वव्यापक, सुखज्ञान आदि का प्रदाता, दुःख-दारिद्र्य आदि का विनाशक, विविध यज्ञ करने में कुशल, दोषों को दग्ध करनेवाला, गुणों को प्राप्त करानेवाला और मरणधर्म से रहित है, उसकी सबको प्रेम से श्रद्धापूर्वक स्तुति करनी चाहिए ॥१॥
Subject
प्रथम मन्त्र में परमात्मा के गुणों का वर्णन है।