Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 448

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- बन्धुः सुबन्धुः श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुश्च क्रमेण गोपायना लौपायना वा Chhand- द्विपदा विराट् पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣢ग्ने꣣ त्वं꣢ नो꣣ अ꣡न्त꣢म उ꣣त꣢ त्रा꣣ता꣢ शि꣣वो꣡ भु꣢वो वरू꣣꣬थ्यः꣢꣯ ॥४४८॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । त्वम् । नः꣣ । अ꣡न्त꣢꣯मः । उ꣣त꣢ । त्रा꣣ता꣢ । शि꣣वः꣢ । भु꣣वः । वरूथ्यः꣢꣯ ॥४४८॥

Mantra without Swara
अग्ने त्वं नो अन्तम उत त्राता शिवो भुवो वरूथ्यः ॥

अग्ने । त्वम् । नः । अन्तमः । उत । त्राता । शिवः । भुवः । वरूथ्यः ॥४४८॥

Samveda - Mantra Number : 448
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 11;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने) अग्रनायक परमात्मन् वा राजन् ! (त्वम्) आप (नः) हमारे (अन्तमः) समीपतम (उत) और (त्राता) विपत्तियों से त्राणकर्ता, (शिवः) कल्याणकारी तथा (वरूथ्यः) वरणीय एवं घरों के लिए हितकर (भुवः) होवो ॥२॥ इस मन्त्र में अर्थश्लेष अलङ्कार है ॥२॥
Essence
जैसे परमेश्वर हमारे निकटतम, विघ्न-विद्वेष-पाप आदि से त्राण करनेवाला, मङ्गलकारी और शरीररूप गृहों का हितकर्ता होता है, वैसे ही निर्वाचन-पद्धति से चुना हुआ राजा प्रजाओं के समीपतम होकर विपत्तियों से बचानेवाला, सुखशान्ति देनेवाला और आवासगृहों के निर्माणार्थ धनादि देनेवाला हो ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में अग्नि नाम द्वारा परमात्मा और राजा से प्रार्थना की गयी है।