Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 434

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- पदपङ्क्तिः Swara- पञ्चमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣢ग्ने꣣ त꣢म꣣द्या꣢श्वं꣣ न꣢꣫ स्तोमैः꣣ क्र꣢तुं꣣ न꣢ भ꣣द्र꣡ꣳ हृ꣢दि꣣स्पृ꣡श꣢म् । ऋ꣣ध्या꣡मा꣢ त꣣ ओ꣡हैः꣣ ॥४३४॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । तम् । अ꣣द्य꣢ । अ꣣ । द्य꣢ । अ꣡श्व꣢꣯म् । न । स्तो꣡मैः꣢꣯ । क्र꣡तु꣢꣯म् । न । भ꣣द्र꣢म् । हृ꣣दिस्पृ꣡शम् । हृ꣣दि । स्पृ꣡श꣢꣯म् । ऋ꣣ध्या꣡म꣢ । ते꣣ । ओ꣡हैः꣢꣯ ॥४३४॥

Mantra without Swara
अग्ने तमद्याश्वं न स्तोमैः क्रतुं न भद्रꣳ हृदिस्पृशम् । ऋध्यामा त ओहैः ॥

अग्ने । तम् । अद्य । अ । द्य । अश्वम् । न । स्तोमैः । क्रतुम् । न । भद्रम् । हृदिस्पृशम् । हृदि । स्पृशम् । ऋध्याम । ते । ओहैः ॥४३४॥

Samveda - Mantra Number : 434
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 9;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने) अग्रनेता प्रकाशक परमेश्वर ! (अश्वं न) घोड़े के समान, और (क्रतुं न) रचयिता शिल्पी के समान (भद्रम्) कल्याणकर्ता, (हृदिस्पृशम्) हृदय को स्पर्श करनेवाले (तम्) उस जगत्प्रसिद्ध तुझको (अद्य) आज (ते ओहैः) तुझे हमारी ओर लानेवाले (स्तोमैः) स्तोत्रों से (ऋध्याम) पूजित करें ॥८॥ इस मन्त्र में उपमालङ्कार है ॥८॥
Essence
जैसे घोड़ा देशान्तर को जाने में साधन बनकर और शिल्पी विविध यन्त्रकला आदि का निर्माण करके हमारा हित करता है, वैसे ही परमेश्वर हमें उन्नति की ओर ले जाकर और हमारे लिए सूर्य, चन्द्र, वायु, फल, मूल आदि विविध वस्तुओं का निर्माण कर हमारा हितकर्ता होता है ॥८॥
Subject
अगले मन्त्र का अग्नि देवता है। इसमें यह विषय है कि कैसे परमात्मा की हम पूजा करें।