Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 400

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- सौभरि: काण्व: Chhand- ककुप् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
यो꣡ न꣢ इ꣣द꣡मि꣢दं पु꣣रा꣡ प्र वस्य꣢꣯ आनि꣣ना꣢य त꣡मु꣢ व स्तुषे । स꣡खा꣢य꣣ इ꣡न्द्र꣢मू꣣त꣡ये꣢ ॥४००॥

यः꣢ । नः꣢ । इद꣡मि꣢दम् । इ꣣द꣢म् । इ꣣दम् । पुरा꣢ । प्र । व꣡स्यः꣢꣯ । आ꣣नि꣡नाय꣢ । आ꣣ । निना꣡य꣢ । तम् । उ꣣ । वः । स्तुषे । स꣡खा꣢꣯यः । स । खा꣣यः । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । ऊ꣣त꣡ये꣢ ॥४००॥

Mantra without Swara
यो न इदमिदं पुरा प्र वस्य आनिनाय तमु व स्तुषे । सखाय इन्द्रमूतये ॥

यः । नः । इदमिदम् । इदम् । इदम् । पुरा । प्र । वस्यः । आनिनाय । आ । निनाय । तम् । उ । वः । स्तुषे । सखायः । स । खायः । इन्द्रम् । ऊतये ॥४००॥

Samveda - Mantra Number : 400
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(यः) जो इन्द्र जगदीश्वर (पुरा) पहले, सृष्टि के आदि में (इदम्-इदम्) इस सब अग्नि, सूर्य, वायु, विद्युत्, बादल, नदी, सागर, चाँदी, सोना आदि (वस्यः) अतिशय निवासक पदार्थ-समूह को (नः) हमारे-तुम्हारे लिए (आ निनाय) लाया था, (तम् उ) उसी (इन्द्रम्) जगदीश्वर की, हे (सखायः) मित्रो ! मैं (वः) तुम्हारी और अपनी (ऊतये) रक्षा के लिए (स्तुषे) स्तुति करता हूँ ॥२॥
Essence
अनेक बहुमूल्य पदार्थ निःशुल्क ही सबको देनेवाले ब्रह्माण्ड के अधिपति परमेश्वर की सबको कृतज्ञतापूर्वक आराधना करनी चाहिए ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में परमेश्वर की दानशीलता का वर्णन है।