Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 395

1875 Mantra
Devata- आदित्याः Rishi- इरिम्बिठिः काण्वः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
तु꣣चे꣡ तुना꣢꣯य꣣ त꣢꣫त्सु नो꣣ द्रा꣡घी꣢य꣣ आ꣡यु꣢र्जी꣣व꣡से꣢ । आ꣡दि꣢त्यासः समहसः कृ꣣णो꣡त꣢न ॥३९५॥

तु꣣चे꣢ । तु꣡ना꣢꣯य । तत् । सु । नः꣣ । द्रा꣡घी꣢꣯यः । आ꣡युः꣢꣯ । जी꣣व꣡से꣢ । आ꣡दि꣢꣯त्यासः । आ । दि꣣त्यासः । समहसः । स । महसः कृणो꣡त꣢न । कृ꣣णो꣡त꣢ । न꣣ ॥३९५॥

Mantra without Swara
तुचे तुनाय तत्सु नो द्राघीय आयुर्जीवसे । आदित्यासः समहसः कृणोतन ॥

तुचे । तुनाय । तत् । सु । नः । द्राघीयः । आयुः । जीवसे । आदित्यासः । आ । दित्यासः । समहसः । स । महसः कृणोतन । कृणोत । न ॥३९५॥

Samveda - Mantra Number : 395
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (समहसः) तेजस्वी (आदित्यासः) आदित्य के समान ज्ञानप्रकाश से भासमान ब्रह्मवित् ब्राह्मणो ! अथवा हे मेरे प्राणो ! तुम (तुचे) सन्तान के लिए, (तुनाय) धन के लिए और (जीवसे) उत्कृष्ट जीवन के लिए (तत्) उस, अन्य प्राणियों से विलक्षण (नः आयुः) हमारी आयु को (द्राघीयः) अधिक लम्बी (सु कृणोतन) सुचारू रूप से कर दो ॥ सन्तान दो प्रकार की होती है, भौतिक और मानस। पुत्र, पुत्री आदि भौतिक तथा नवीन ज्ञान-विज्ञानादि मानस सन्तान कहलाती है। धन भी द्विविध होता है, भौतिक और आध्यात्मिक। चाँदी, सोना, कपड़ा, धान्य, मुद्रा आदि भौतिक धन तथा अहिंसा, सत्य, न्याय, योगसिद्धि आदि आध्यात्मिक धन कहाता है। उत्कृष्ट जीवन भी दो प्रकार का होता है, बाह्य और आध्यात्मिक। भौतिक सुख-सम्पदा आदि से पूर्ण जीवन बाह्य और अध्यात्म-पथ का पथिक जीवन आध्यात्मिक कहाता है। यह सब हमारे लिए सुलभ हो, एतदर्थ लम्बी आयु की प्रार्थना की गयी है ॥५॥ इस मन्त्र में ‘तुना, तन’ में छेकानुप्रास अलङ्कार है। त्, स् और न् की पृथक्-पृथक् अनेक बार आवृत्ति में वृत्त्यनुप्रास है ॥५॥
Essence
प्राणायाम से और विद्वान् ब्राह्मणों द्वारा उपदेश किये गये मार्ग का अनुसरण करने से हमारी आयु अधिक लम्बी हो सकती है। अधिक लम्बी आयु प्राप्त कर अपनी रुचि के अनुसार प्रेय-मार्ग या श्रेय-मार्ग में हमें पग रखना चाहिए ॥५॥
Subject
अगले मन्त्र के आदित्य देवता हैं। इसमें दीर्घतर आयु की प्रार्थना की गयी है।