Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 36

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- भर्गः प्रागाथः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
पा꣣हि꣡ नो꣢ अग्न꣣ ए꣡क꣢या पा꣣ह्यू꣡३꣱त꣢ द्वि꣣ती꣡य꣢या । पा꣣हि꣢ गी꣣र्भि꣢स्ति꣣सृ꣡भि꣢रूर्जां पते पा꣣हि꣡ च꣢त꣣सृ꣡भि꣢र्वसो ॥३६॥

पा꣣हि꣢ । नः꣣ । अग्ने । ए꣡क꣢꣯या । पा꣣हि꣢ । उ꣣त꣢ । द्वि꣣ती꣡य꣢या । पा꣣हि꣢ । गी꣣र्भिः꣢ । ति꣣सृ꣡भिः꣢ । ऊ꣣र्जाम् । पते । पाहि꣢ । च꣣तसृ꣡भिः꣢ । व꣣सो ॥३६॥

Mantra without Swara
पाहि नो अग्न एकया पाह्यू३त द्वितीयया । पाहि गीर्भिस्तिसृभिरूर्जां पते पाहि चतसृभिर्वसो ॥

पाहि । नः । अग्ने । एकया । पाहि । उत । द्वितीयया । पाहि । गीर्भिः । तिसृभिः । ऊर्जाम् । पते । पाहि । चतसृभिः । वसो ॥३६॥

Samveda - Mantra Number : 36
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
प्रथम—परमात्मा के पक्ष में। हे (ऊर्जां पते) अन्नों, रसों, बलों और प्राणों के अधिपति, (वसो) सर्वत्र बसनेवाले सर्वान्तर्यामी तथा निवासप्रदायक (अग्ने) परमात्मन् ! आप (नः) हमारी (एकया) एक ऋग्-रूप वाणी से (रक्ष) रक्षा कीजिए; (उत) और (द्वितीयया) दूसरी यजुःरूप वाणी से (पाहि) रक्षा कीजिए; (तिसृभिः) तीन ऋग्, यजुः और सामरूप सम्मिलित (गीर्भिः) वाणियों से (पाहि) रक्षा कीजिए; (चतसृभिः) चार ऋग्, यजुः, साम और अथर्वरूप सम्मिलित वाणियों से (पाहि) रक्षा कीजिए। यहाँ चार बार पाहि के प्रयोग से परमेश्वर द्वारा करणीय रक्षा की निरन्तरता सूचित होती है ॥ द्वितीय—विद्वान् के पक्ष में। हे (ऊर्जां पते) बलों के पालक, (वसो) उत्तम निवास देनेवाले, (अग्ने) अग्नि के तुल्य विद्या-प्रकाश से युक्त विद्वन् ! आप (एकया) एक उत्तम शिक्षा से (नः) हमारी (पाहि) रक्षा कीजिए; (उत) और (द्वितीयया) दूसरी अध्यापन-क्रिया से (पाहि) रक्षा कीजिए; (तिसृभिः) कर्म-काण्ड, उपासना-काण्ड और ज्ञान-काण्ड को जतानेवाली तीन (गीर्भिः) वाणियों से (पाहि) रक्षा कीजिए; (चतसृभिः) धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इनका विज्ञान करानेवाली चार प्रकार की वाणियों से (पाहि) रक्षा कीजिए ॥२॥४
Essence
चार वेदवाणियाँ परमेश्वर ने हमारे हित के लिए प्रदान की हैं। यदि हम वेदवर्णित ज्ञान, कर्म, उपासना और विज्ञान विषयों को पढ़कर कर्तव्य कर्मों का आचरण करें, तो निस्सन्देह हमारी रक्षा होगी। विद्वानों को चाहिए कि वेद पढ़ाकर वेदविहित धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का उपदेश देकर हमारी रक्षा करें ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में परमेश्वर और विद्वान् मनुष्य से प्रार्थना करते हैं।