Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 263

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
स꣣त्य꣢मि꣣त्था꣡ वृषे꣢꣯दसि꣣ वृ꣡ष꣢जूतिर्नोऽवि꣣ता꣢ । वृ꣢षा꣣꣬ ह्यु꣢꣯ग्र शृण्वि꣣षे꣡ प꣢रा꣣व꣢ति꣣ वृ꣡षो꣢ अर्वा꣣व꣡ति꣢ श्रु꣣तः꣢ ॥२६३॥

स꣣त्य꣢म् । इ꣣त्था꣢ । वृ꣡षा꣢꣯ । इत् । अ꣣सि । वृ꣡ष꣢꣯जूतिः । वृ꣡ष꣢꣯ । जू꣣तिः । नः । अविता꣢ । वृ꣡षा꣢꣯ । हि । उ꣣ग्र । शृण्विषे꣢ । प꣣राव꣡ति꣢ । वृ꣡षा꣢꣯ । उ꣣ । अर्वाव꣡ति꣢ । श्रु꣣तः꣢ ॥२६३॥

Mantra without Swara
सत्यमित्था वृषेदसि वृषजूतिर्नोऽविता । वृषा ह्युग्र शृण्विषे परावति वृषो अर्वावति श्रुतः ॥

सत्यम् । इत्था । वृषा । इत् । असि । वृषजूतिः । वृष । जूतिः । नः । अविता । वृषा । हि । उग्र । शृण्विषे । परावति । वृषा । उ । अर्वावति । श्रुतः ॥२६३॥

Samveda - Mantra Number : 263
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे इन्द्र परमेश्वर ! (सत्यम् इत्था) सचमुच-सचमुच आप (वृषा इत्) ऐश्वर्यवर्षी होने से वर्षा करनेवाले बादल ही (असि) हो, और (वृषजूतिः) विद्युत् आदि पदार्थों को मन के वेग के समान वेग प्रदान करनेवाले (नः) हमारे (अविता रक्षक हो। हे (उग्र प्रबल ऐश्वर्यवाले ! आप (परावति) उत्कृष्ट मोक्ष-लोक में (वृषा हि) निश्चय ही मोक्ष के आनन्दों की वर्षा करनेवाले (शृण्विषे) सुने जाते हो, और (अर्वावति) इस लोक में भी (वृषः) धर्म-अर्थ-काम-आनन्दों के वर्षक (श्रुतः) सुने गये हो ॥१॥ इस मन्त्र में ‘वृषे, वृष वृषा, वृषो’ में वृत्त्यनुप्रास अलङ्कार है। ‘वृषेदसि’—‘आप बादल ही हो’ यहाँ परमेश्वर में बादल का आरोप होने से रूपक है। ‘वति, वति’ में छेकानुप्रास है ॥१॥
Essence
समस्तगुणगुणों में अग्रणी, इहलोक तथा परलोक में विविध आनन्दों की वृष्टि करनेवाले, परोपकारी परमेश्वर की हम वन्दना क्यों न करें ॥१॥
Subject
प्रथम मन्त्र में परमेश्वर के गुणों का वर्णन किया गया है।