Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 249

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिर्मेध्यातिथिर्वा काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣢न्द्र꣣मि꣢द्दे꣣व꣡ता꣢तय꣣ इ꣡न्द्रं꣢ प्रय꣣꣬त्य꣢꣯ध्व꣣रे꣢ । इ꣡न्द्र꣢ꣳ समी꣣के꣢ व꣣नि꣡नो꣢ हवामह꣣ इ꣢न्द्रं꣣ ध꣡न꣢स्य सा꣣त꣡ये꣢ ॥२४९॥

इ꣡न्द्र꣢꣯म् । इत् । दे꣣व꣡ता꣢तये । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । प्र꣣यति꣢ । प्र꣣ । यति꣢ । अ꣣ध्वरे꣢ । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । स꣣मीके꣢ । स꣣म् । ईके꣢ । व꣣नि꣡नः꣢ । ह꣣वामहे । इ꣡न्द्र꣢म् । ध꣡न꣢꣯स्य । सा꣣त꣡ये꣢ ॥२४९॥

Mantra without Swara
इन्द्रमिद्देवतातय इन्द्रं प्रयत्यध्वरे । इन्द्रꣳ समीके वनिनो हवामह इन्द्रं धनस्य सातये ॥

इन्द्रम् । इत् । देवतातये । इन्द्रम् । प्रयति । प्र । यति । अध्वरे । इन्द्रम् । समीके । सम् । ईके । वनिनः । हवामहे । इन्द्रम् । धनस्य । सातये ॥२४९॥

Samveda - Mantra Number : 249
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्रम् इत्) इन्द्र नामक जगदीश्वर और सभापति राजा को (देवतातये) विद्वानों के कल्याण के लिए अथवा विद्वानों से फैलाये जानेवाले यज्ञ की पूर्ति के लिए (हवामहे) हम पुकारते हैं। (इन्द्रम्) जगदीश्वर औरराजा को (प्रयति) प्रवृत्त होते हुए (अध्वरे) हिंसादि दोषों से रहित यज्ञ में (हवामहे) हम पुकारते हैं। (इन्द्रम्) जगदीश्वर और राजा को (समीके) देवासुर-संग्राम में (वनिनः) स्तुति, प्रार्थना एवं ज्ञानप्रकाश से युक्त हम लोग (हवामहे) पुकारते हैं। (इन्द्रम्) जगदीश्वर औरराजा को (धनस्य) आध्यात्मिक एवं भौतिक ऐश्वर्य की (सातये) प्राप्ति के लिए (हवामहे) हम पुकारते हैं ॥७॥ इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है। इन्द्र शब्द की अनेक बार आवृत्ति में लाटानुप्रास अलङ्कार है ॥७॥
Essence
जगत् में अथवा राष्ट्र में विविध सत्कार्यों की सफलता के लिए और विविध ऐश्वर्यों की प्राप्ति के लिए परमात्मा तथा सभापति राजा का पुनःपुनः श्रद्धापूर्वक सेवन करना चाहिए ॥७॥
Subject
अगले मन्त्र में इन्द्र नाम से परमेश्वर और राजा का आह्वान किया गया है।