Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1873

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- जय ऐन्द्रः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
मृ꣣गो꣢꣫ न भी꣣मः꣡ कु꣢च꣣रो꣡ गि꣢रि꣣ष्ठाः꣡ प꣢रा꣣व꣢त꣣ आ꣡ ज꣢गन्था꣣ प꣡र꣢स्याः । सृ꣣क꣢ꣳ स꣣ꣳशा꣡य꣢ प꣣वि꣡मि꣢न्द्र ति꣣ग्मं꣡ वि शत्रू꣢꣯न् ताढि꣣ वि मृधो꣢꣯ नुदस्व ॥१८७३॥

मृ꣣गः꣢ । न । भी꣣मः꣢ । कु꣣चरः꣢ । गि꣣रिष्ठाः꣢ । गि꣣रि । स्थाः꣢ । प꣣राव꣡तः꣢ । आ । ज꣣गन्थ । प꣡र꣢꣯स्याः । सृ꣣क꣢म् । स꣣ꣳशा꣡य꣢ । स꣣म् । शा꣡य꣢꣯ । प꣣वि꣢म् । इ꣣न्द्र । तिग्म꣢म् । वि । श꣣त्रू꣢꣯न् । ता꣢ढि । वि꣢ । मृ꣡धः꣢꣯ । नु꣣दस्व ॥१८७३॥

Mantra without Swara
मृगो न भीमः कुचरो गिरिष्ठाः परावत आ जगन्था परस्याः । सृकꣳ सꣳशाय पविमिन्द्र तिग्मं वि शत्रून् ताढि वि मृधो नुदस्व ॥

मृगः । न । भीमः । कुचरः । गिरिष्ठाः । गिरि । स्थाः । परावतः । आ । जगन्थ । परस्याः । सृकम् । सꣳशाय । सम् । शाय । पविम् । इन्द्र । तिग्मम् । वि । शत्रून् । ताढि । वि । मृधः । नुदस्व ॥१८७३॥

Samveda - Mantra Number : 1873
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 9; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 21; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (इन्द्र) वीर मानव ! तू (भीमः) भयङ्कर, (कुचरः) भूमि पर विचरनेवाले, (गिरिष्ठाः) पर्वत की गुफा में निवास करनेवाले (मृगः न) शेर के समान (भीमः) दुष्टों के लिए भयङ्कर, (कुचरः) भू-विहारी और (गिरिष्ठाः) पर्वत के सदृश उन्नत पद पर प्रतिष्ठित हो। (परावतः) सुदूर देश से (परस्याः) और दूर दिशा से (आ जगन्थ) शत्रुओं के साथ युद्ध करने के लिए आ। (सृकम्) गतिशील, (तिग्मम्) तीक्ष्ण (पविम्) वज्र को, शस्त्रास्त्रसमूह को (संशाय) और अधिक तीक्ष्ण करके (शत्रून्) शत्रुओं को (वि ताढि) विताड़ित कर, (मृधः) हिंसकों को (वि नुदस्व) दूर भगा दे ॥१॥ यहाँ श्लिष्टोपमालङ्कार है ॥१॥
Essence
मनुष्यों को चाहिए कि वीरता का सञ्चय करके जैसे बाहरी शत्रुओं को पराजित करें वैसे ही आन्तरिक शत्रुओं को भी निर्मूल करें ॥१॥
Subject
प्रथम मन्त्र में मानव को उद्बोधन दिया गया है।