Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1817

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- अग्निः पावकः Chhand- विष्टारपङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
पा꣣वक꣡व꣢र्चाः शु꣣क्र꣡व꣢र्चा꣣ अ꣡नू꣢नवर्चा꣣ उ꣡दि꣢यर्षि भा꣣नु꣡ना꣢ । पु꣣त्रो꣢ मा꣣त꣡रा꣢ वि꣣च꣢र꣣न्नु꣡पा꣢वसि पृ꣣ण꣢क्षि꣣ रो꣡द꣢सी उ꣣भे꣢ ॥१८१७॥

पावक꣡व꣢र्चाः । पा꣣वक꣢ । व꣣र्चाः । शुक्र꣡व꣢र्चाः । शु꣣क्र꣢ । व꣣र्चाः । अ꣡नू꣢꣯नवर्चाः । अ꣡नू꣢꣯न । व꣣र्चाः । उ꣣त् । इ꣣यर्षि । भानु꣡ना꣢ । पु꣣त्रः꣢ । पु꣣त् । त्रः꣢ । मा꣣त꣡रा꣢ । वि꣣च꣡र꣢न् । वि꣣ । च꣡र꣢꣯न् । उ꣡प꣢꣯ । अ꣣वसि । पृण꣡क्षि꣢ । रो꣡द꣢꣯सीइ꣡ति꣢ । उ꣣भे꣡इति꣢ ॥१८१७॥

Mantra without Swara
पावकवर्चाः शुक्रवर्चा अनूनवर्चा उदियर्षि भानुना । पुत्रो मातरा विचरन्नुपावसि पृणक्षि रोदसी उभे ॥

पावकवर्चाः । पावक । वर्चाः । शुक्रवर्चाः । शुक्र । वर्चाः । अनूनवर्चाः । अनून । वर्चाः । उत् । इयर्षि । भानुना । पुत्रः । पुत् । त्रः । मातरा । विचरन् । वि । चरन् । उप । अवसि । पृणक्षि । रोदसीइति । उभेइति ॥१८१७॥

Samveda - Mantra Number : 1817
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 9; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 20; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे अग्रनायक जगदीश्वर ! (पावकवर्चाः) पवित्रकारी तेजवाले, (शुक्रवर्चाः) उज्ज्वल और पवित्र तेजवाले, (अनूनवर्चाः) अन्यून तेजवाले आप (भानुना) ज्योति के साथ, उपासकों के अन्तरात्मा में (उदियर्षि) उदित होते हो। (मातरा) माता-पिता के समीप (विचरन्) विचरण करते हुए (पुत्रः) पुत्र के समान (मातरा) द्युलोक और भूलोक में (विचरन्) विचरण करते हुए आप उनकी (उपावसि) रक्षा करते हो। साथ ही (रोदसी) द्युलोक और भूलोक (उभे) दोनों को (पृणक्षि) आपस में संयुक्त करते हो ॥२॥ यहाँ तीसरे चरण में शिलष्ट लुप्तोपमा अलङ्कार है। ‘वर्चा’ की आवृत्ति में लाटानुप्रास है ॥२॥
Essence
परमेश्वर सूर्य के समान अपने दिव्य तेज से स्तोताओं के हृदय को पवित्र करता है, द्यावापृथिवी की रक्षा करता है और उनके मध्य आपस का सामञ्जस्य स्थापित करता है ॥२॥
Subject
अब परमात्मा कैसा है और क्या करता है, यह कहते हैं।