Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1809

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- नीपातिथिः काण्वः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
आ꣢ त्वा꣣ ग्रा꣢वा꣣ व꣡द꣢न्नि꣣ह꣢ सो꣣मी꣡ घोषे꣢꣯ण वक्षतु । दि꣣वो꣢ अ꣣मु꣢ष्य꣣ शा꣡स꣢तो꣣ दि꣡वं꣢ य꣣य꣡ दि꣢वावसो ॥१८०९॥

आ꣢ । त्वा꣣ । ग्रा꣡वा꣢꣯ । व꣡द꣢꣯न् । इ꣣ह꣢ । सो꣣मी꣢ । घो꣡षे꣢꣯ण । व꣣क्षतु । दि꣣वः꣢ । अ꣣मु꣡ष्य꣢ । शा꣡स꣢꣯तः । दि꣡व꣢꣯म् । य꣣य꣢ । दि꣣वावसो । दिवा । वसो ॥१८०९॥

Mantra without Swara
आ त्वा ग्रावा वदन्निह सोमी घोषेण वक्षतु । दिवो अमुष्य शासतो दिवं यय दिवावसो ॥

आ । त्वा । ग्रावा । वदन् । इह । सोमी । घोषेण । वक्षतु । दिवः । अमुष्य । शासतः । दिवम् । यय । दिवावसो । दिवा । वसो ॥१८०९॥

Samveda - Mantra Number : 1809
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 9; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 20; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे जगदीश्वर ! (इह) इस देहपुरी में (सोमी) श्रद्धारस से भरा हुआ (ग्रावा) पूजक जीवात्मा (वदन्) स्तोत्रों का उच्चारण करता हुआ (घोषेण) स्वागत-शब्द से (त्वा) आपको (आ वक्षतु) अपने पास लाये। हे (दिवावसो) दीप्तिधन परमात्मन् ! (दिवः) तेजोमयी देहपुरी के (शासतः) शासक (अमुष्य) इस जीवात्मा की (दिवम्) तेजोमयी देहपुरी में, आप (यय) आओ ॥३॥
Essence
जो हार्दिक स्वागत-वचनों के साथ परमात्मा को पुकारता है, उसकी प्रार्थना को वह अवश्य सुनता है ॥३॥
Subject
आगे फिर परमात्मा को पुकारा जा रहा है।