Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1762

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अवत्सारः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣भि꣢ प्रि꣣या꣢णि꣣ का꣢व्या꣣ वि꣢श्वा꣣ च꣡क्षा꣢णो अर्षति । ह꣡रि꣢स्तुञ्जा꣣न꣡ आयु꣢꣯धा ॥१७६२॥

अ꣣भि꣢ । प्रि꣣या꣡णि꣢ । का꣡व्या꣢꣯ । वि꣡श्वा꣢꣯ । च꣡क्षा꣢꣯णः । अ꣣र्षति । ह꣡रिः꣢꣯ । तु꣣ञ्जानः꣢ । आ꣡यु꣢꣯धा ॥१७६२॥

Mantra without Swara
अभि प्रियाणि काव्या विश्वा चक्षाणो अर्षति । हरिस्तुञ्जान आयुधा ॥

अभि । प्रियाणि । काव्या । विश्वा । चक्षाणः । अर्षति । हरिः । तुञ्जानः । आयुधा ॥१७६२॥

Samveda - Mantra Number : 1762
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 19; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(हरिः) मनोहर तथा दोषों को हरनेवाला परमेश्वर (विश्वा) सब (प्रियाणि) प्रिय (काव्या) हितकर वचनों को (चक्षाणः) बोलता हुआ और (आयुधा) शस्त्रास्त्रों को, अर्थात् काम-क्रोध आदि शत्रुओं के पराजय के लिए शत्रु-दलन-सामर्थ्यों को (तुञ्जानः) देता हुआ (अभि अर्षति) हमारे प्रति आ रहा है, अन्तरात्मा में प्रकट हो रहा है ॥२॥
Essence
परमेश्वर हमारे लिए हितकारी सन्देशों को प्रेरित करता है और शत्रुओं को हराने के लिए बल देता है ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में परमेश्वर क्या करता है, यह कहा गया है।