Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1735

1875 Mantra
Devata- अश्विनौ Rishi- गोतमो राहूगणः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
ए꣢꣫ह दे꣣वा꣡ म꣢यो꣣भु꣡वा꣢ द꣣स्रा꣡ हिर꣢꣯ण्यवर्त्तनी । उ꣣षर्बु꣡धो꣢ वहन्तु꣣ सो꣡म꣢पीतये ॥१७३५॥

आ꣢ । इ꣣ह꣢ । दे꣣वा꣢ । म꣣योभुवा । मयः । भु꣡वा꣢꣯ । द꣣स्रा꣢ । हि꣡र꣢꣯ण्यवर्त्तनी । हि꣡र꣢꣯ण्य । व꣣र्त्तनीइ꣡ति꣢ । उ꣣षर्बु꣡धः꣢ । उ꣣षः । बु꣡धः꣢꣯ । व꣣हन्तु । सो꣡म꣢꣯पीतये । सो꣡म꣢꣯ । पी꣣तये ॥१७३५॥

Mantra without Swara
एह देवा मयोभुवा दस्रा हिरण्यवर्त्तनी । उषर्बुधो वहन्तु सोमपीतये ॥

आ । इह । देवा । मयोभुवा । मयः । भुवा । दस्रा । हिरण्यवर्त्तनी । हिरण्य । वर्त्तनीइति । उषर्बुधः । उषः । बुधः । वहन्तु । सोमपीतये । सोम । पीतये ॥१७३५॥

Samveda - Mantra Number : 1735
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 19; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(उषर्बुधः) जो उषा-काल में बोध प्राप्त करते हैं, वे लोग (सोमपीतये) सुख, स्वास्थ्य, दीर्घायुष्य, शान्ति आदि की रक्षा के लिए, (इह) इस शरीर में (देवा) गमन-आगमन करनेवाले, (मयोभुवा) सुख देनेवाले (दस्रा) दोषों को क्षीण करनेवाले, (हिरण्यवर्त्तनी) शारीरिक और मानसिक तेज को देनेवाले प्राण-अपान रूप अश्विनों को (आ वहन्तु) लायें, अर्थात् प्राणायाम को साधें ॥२॥
Essence
मनुष्यों को चाहिए कि योग के अङ्ग प्राणायाम के द्वारा सब शारीरिक व मानसिक दोषों को जलाकर, योगसिद्धि प्राप्त करके अभ्युदय और निःश्रेयस को सिद्ध करें ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में प्राणायाम का विषय है।