Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 167

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- कुसीदी काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
आ꣡ तू न꣢꣯ इन्द्र क्षु꣣म꣡न्तं꣢ चि꣣त्रं꣢ ग्रा꣣भ꣡ꣳ सं गृ꣢꣯भाय । म꣣हाहस्ती꣡ दक्षि꣢꣯णेन ॥१६७॥

आ꣢ । तु । नः꣢ । इन्द्र । क्षुम꣡न्त꣢म् । चि꣣त्र꣢म् । ग्रा꣣भ꣢म् । सम् । गृ꣣भाय । महाहस्ती꣢ । म꣣हा । हस्ती꣢ । द꣡क्षि꣢꣯णेन ॥१६७॥

Mantra without Swara
आ तू न इन्द्र क्षुमन्तं चित्रं ग्राभꣳ सं गृभाय । महाहस्ती दक्षिणेन ॥

आ । तु । नः । इन्द्र । क्षुमन्तम् । चित्रम् । ग्राभम् । सम् । गृभाय । महाहस्ती । महा । हस्ती । दक्षिणेन ॥१६७॥

Samveda - Mantra Number : 167
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
प्रथम—राजा के पक्ष में। हे (इन्द्र) परमैश्वर्यशाली राजन् ! (महाहस्ती) बड़ी सूँडवाले हाथी के समान विशाल भुजावाले आप (तु) शीघ्र ही (दक्षिणेन) दाहिने हाथ से (नः) हमारे लिए अर्थात् हमें दान करने के लिए (क्षुमन्तम्) प्रशस्त अन्नों से युक्त (चित्रम्) आश्चर्यकारी (ग्राभम्) ग्राह्य धन को (आ) चारों ओर से (संगृभाय) संग्रह कीजिए ॥ द्वितीय—परमात्मा के पक्ष में। हे (इन्द्र) परमैश्वर्यशाली परमात्मन् ! आप (तु) शीघ्र ही (नः) हमें देने के लिए (क्षुमन्तम्) भौतिक धन, अन्न आदि से युक्त (चित्रम्) अद्भुत (ग्राभम्) ग्राह्य अध्यात्मसम्पत्ति रूप धन को (संगृभाय) संगृहीत कीजिए, जैसे (महाहस्ती) विशाल भुजाओंवाला कोई मनुष्य (दक्षिणेन) अपने दाहिने हाथ से वस्तुओं का संग्रह करता है, अथवा, जैसे (महाहस्ती) प्रशस्त किरणोंवाला हिरण्यपाणि सूर्य (दक्षिणेन) अपने समृद्ध किरणजाल से भूमि पर स्थित जलों का संग्रह करता है अथवा जैसे (महाहस्ती) विशाल हाथी (दक्षिणेन) अपने बलवान् सूँड-रूप हाथ से विविध वस्तुओं का संग्रह करता है ॥३॥ इस मन्त्र श्लेषालङ्कार है। ‘महाहस्ती’ में लुप्तोपमा है ॥३॥
Essence
परमेश्वर और राजा सब प्रजाजनों को पुरुषार्थी करके प्रचुर धन-धान्य से सम्पन्न, विद्यावान्, धार्मिक और योगविद्या के ऐश्वर्य से युक्त करें ॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में परमात्मा और राजा से प्रार्थना की गयी है।