Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1649

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- विरूप आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
कु꣣वि꣢꣫त्सु नो꣣ ग꣡वि꣢ष्ट꣣ये꣡ऽग्ने꣢ सं꣣वे꣡षि꣢षो र꣣यि꣢म् । उ꣡रु꣢कृदु꣣रु꣡ ण꣢स्कृधि ॥१६४९॥

कु꣡वि꣢त् । सु । नः꣣ । ग꣡वि꣢꣯ष्टये । गो । इ꣣ष्टये । अ꣡ग्ने꣢꣯ । सं꣣वे꣡षि꣢षः । स꣣म् । वे꣡षि꣢꣯षः । र꣣यि꣢म् । उ꣡रु꣢꣯कृत् । उ꣡रु꣢꣯ । कृ꣣त् । उरु꣢ । नः꣣ । कृधि ॥१६४९॥

Mantra without Swara
कुवित्सु नो गविष्टयेऽग्ने संवेषिषो रयिम् । उरुकृदुरु णस्कृधि ॥

कुवित् । सु । नः । गविष्टये । गो । इष्टये । अग्ने । संवेषिषः । सम् । वेषिषः । रयिम् । उरुकृत् । उरु । कृत् । उरु । नः । कृधि ॥१६४९॥

Samveda - Mantra Number : 1649
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 17; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने) अग्रनायक परमात्मन्, राजन् वा योगिराज ! आप(नः) हमारे (गविष्टये) विवेकख्याति के प्रकाशों की प्राप्ति के लिए अथवा विविध विद्याओं में गवेषणा के लिए(कुवित्) बहुत (रयिम्) आध्यात्मिक ऐश्वर्य वा भौतिक धन(सु संवेषिषः) भलीभाँति प्राप्त कराओ। (उरुकृत्) बहुत देनेवाले आप (नः) हमारे लिए (उरु) बहुत (कृधि) दो ॥२॥
Essence
परमात्मा की कृपा से और योग-प्रशिक्षक के योग्य मार्गदर्शन से योगाभ्यासी शिष्य आध्यात्मिक धन प्राप्त करके मोक्ष के अधिकारी होवें और राजा विविध विज्ञानों में अनुसन्धान के इच्छुकों को धन प्राप्त करा कर राष्ट्र में विद्यासूर्य के उदय में सहायक हो ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में पुनः उन्हीं से प्रार्थना की गयी है।