Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1593

1875 Mantra
Devata- पूषा Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ꣣त꣡ नो꣢ गो꣣ष꣢णिं꣣ धि꣡य꣢मश्व꣣सां꣡ वा꣢ज꣣सा꣢मु꣣त꣢ । नृ꣣व꣡त्कृ꣢णुह्यू꣣त꣡ये꣢ ॥१५९३॥

उ꣣त꣢ । नः꣣ । गोष꣡णि꣢म् । गो꣣ । स꣡नि꣢꣯म् । धि꣡य꣢꣯म् । अ꣣श्वसा꣢म् । अ꣣श्व । सा꣢म् । वा꣣जसा꣢म् । वा꣣ज । सा꣢म् । उ꣣त꣢ । नृ꣣व꣢त् । कृ꣣णुहि । ऊत꣡ये꣢ ॥१५९३॥

Mantra without Swara
उत नो गोषणिं धियमश्वसां वाजसामुत । नृवत्कृणुह्यूतये ॥

उत । नः । गोषणिम् । गो । सनिम् । धियम् । अश्वसाम् । अश्व । साम् । वाजसाम् । वाज । साम् । उत । नृवत् । कृणुहि । ऊतये ॥१५९३॥

Samveda - Mantra Number : 1593
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे पूषन् ! हे पुष्टिप्रदाता जगदीश्वर ! आप (ऊतये) रक्षार्थ (नः) हमारे लिए (गोषणिम्) अन्तःप्रकाश को प्राप्त करनेवाली, (उत) और (अश्वसाम्) इन्द्रिय-बलों को प्राप्त करनेवाली, (उत) और (वाजसाम्) प्राण-बलों को प्राप्त करनेवाली, तथा (नृवत्) पुरुषार्थयुक्त (धियम्) प्रज्ञा को (कृणुहि) प्रदान करो ॥१॥
Essence
परमेश्वर की उपासना से मनुष्यों को आत्मबल, इन्द्रिय-बल, प्राण-बल, प्रज्ञा-बल और पुरुषार्थ-बल प्राप्त करना योग्य है ॥१॥
Subject
अगले एक ऋचावाले सूक्त में पूषा परमेश्वर से प्रार्थना की गयी है।