Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1588

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेध्यातिथिः काण्वः Chhand- बार्हतः प्रगाथः (विषमा बृहती, समा सतोबृहती) Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्रो꣢ म꣣ह्ना꣡ रोद꣢꣯सी पप्रथ꣣च्छ꣢व꣣ इ꣢न्द्रः꣣ सू꣡र्य꣢मरोचयत् । इ꣡न्द्रे꣢ ह꣣ वि꣢श्वा꣣ भु꣡व꣢नानि येमिर꣣ इ꣡न्द्रे꣢ स्वा꣣ना꣢स꣣ इ꣡न्द꣢वः ॥१५८८॥

इ꣡न्द्रः꣢꣯ । म꣣ह्ना꣢ । रो꣡द꣢꣯सी꣣इ꣡ति꣢ । प꣣प्रथत् । श꣡वः꣢꣯ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । सू꣡र्य꣢꣯म् । अ꣣रोचयत् । इ꣡न्द्रे꣢꣯ । ह꣢ । वि꣡श्वा꣢꣯ । भु꣡व꣢꣯नानि । ये꣣मिरे । इ꣡न्द्रे꣢꣯ । स्वा꣣ना꣡सः꣢ । इ꣡न्द꣢꣯वः ॥१५८८॥

Mantra without Swara
इन्द्रो मह्ना रोदसी पप्रथच्छव इन्द्रः सूर्यमरोचयत् । इन्द्रे ह विश्वा भुवनानि येमिर इन्द्रे स्वानास इन्दवः ॥

इन्द्रः । मह्ना । रोदसीइति । पप्रथत् । शवः । इन्द्रः । सूर्यम् । अरोचयत् । इन्द्रे । ह । विश्वा । भुवनानि । येमिरे । इन्द्रे । स्वानासः । इन्दवः ॥१५८८॥

Samveda - Mantra Number : 1588
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्रः) जगदीश्वर ने (मह्ना) अपनी महिमा से (रोदसी) द्यावापृथिवी को और (शवः) उनके बल को (पप्रथत्) फैलाया है। (इन्द्रः) जगदीश्वर ने ही (सूर्यम्) सूर्य को (अरोचयत्) चमकाया है। (इन्द्रे ह) जगदीश्वर के आश्रय में ही (विश्वा भुवनानि) सब लोक (येमिरे) नियन्त्रित हैं। (इन्द्रे) जगदीश्वर के आश्रय में ही (स्वानासः) बहते हुए (इन्दवः) जल (येमिरे) नियन्त्रित हैं ॥२॥
Essence
ग्रह, उपग्रह, सूर्य, नक्षत्र, नीहारिका आदि सभी लोक जगत्स्रष्टा परमेश्वर की ही महिमा से धारित और नियन्त्रित होकर ठहरे हुए हैं ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में जगदीश्वर की महिमा वर्णित है।