Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1561

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
अ꣢ग्ने꣣ वा꣡ज꣢स्य꣣ गो꣡म꣢त꣣ ई꣡शा꣢नः सहसो यहो । अ꣣स्मे꣡ दे꣢हि जातवेदो꣣ म꣢हि꣣ श्र꣡वः꣢ ॥१५६१॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । वा꣡ज꣢꣯स्य । गो꣡म꣢꣯तः । ई꣡शा꣢꣯नः । स꣣हसः । यहो । अस्मे꣡इति꣢ । दे꣣हि । जातवेदः । जात । वेदः । म꣡हि꣢꣯ । श्र꣡वः꣢꣯ ॥१५६१॥

Mantra without Swara
अग्ने वाजस्य गोमत ईशानः सहसो यहो । अस्मे देहि जातवेदो महि श्रवः ॥

अग्ने । वाजस्य । गोमतः । ईशानः । सहसः । यहो । अस्मेइति । देहि । जातवेदः । जात । वेदः । महि । श्रवः ॥१५६१॥

Samveda - Mantra Number : 1561
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 15; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने) छात्रों को उन्नत करनेवाले विद्वान् आचार्यवर ! हे (सहसः यहो) आत्मबल के पुत्र अर्थात् अतिशय आत्मबल से युक्त ! हे (जातवेदः) उत्पन्न पदार्थों के ज्ञाता ! (गोमतः वाजस्य) वेदवाणी से युक्त ऐश्वर्य के (ईशानः) अधीश्वर आप (अस्मे) हमारे लिए (महि श्रवः) महान् शास्त्रज्ञान और उससे उत्पन्न यश (देहि) प्रदान करो ॥१॥
Essence
आचार्य के पास से विविध विद्याओं का ज्ञान पाकर शिष्य विद्वान् और कीर्तिमान् बनें ॥१॥
Subject
प्रथम ऋचा पूर्वार्चिक में ९९ क्रमाङ्क पर परमात्मा, विद्वान् और राजा को सम्बोधित की गयी थी। यहाँ आचार्य से प्रार्थना करते हैं ॥