Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1552

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- भर्गः प्रागाथः Chhand- बार्हतः प्रगाथः (विषमा बृहती, समा सतोबृहती) Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
अ꣢ग्न꣣ आ꣡ या꣢ह्य꣣ग्नि꣢भि꣣र्हो꣡ता꣢रं त्वा वृणीमहे । आ꣡ त्वाम꣢꣯नक्तु꣣ प्र꣡य꣢ता ह꣣वि꣡ष्म꣢ती꣣ य꣡जि꣢ष्ठं ब꣣र्हि꣢रा꣣स꣡दे꣢ ॥१५५२॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । आ । या꣣हि । अग्नि꣡भिः꣢ । हो꣡ता꣢꣯रम् । त्वा꣣ । वृणीमहे । आ꣢ । त्वाम् । अ꣣नक्तु । प्र꣡य꣢꣯ता । प्र । य꣣ता । हवि꣡ष्म꣢ती । य꣡जि꣢꣯ष्ठम् । ब꣣र्हिः꣢ । आ꣣स꣡दे꣢ । आ꣣ । स꣡दे꣢꣯ ॥१५५२॥

Mantra without Swara
अग्न आ याह्यग्निभिर्होतारं त्वा वृणीमहे । आ त्वामनक्तु प्रयता हविष्मती यजिष्ठं बर्हिरासदे ॥

अग्ने । आ । याहि । अग्निभिः । होतारम् । त्वा । वृणीमहे । आ । त्वाम् । अनक्तु । प्रयता । प्र । यता । हविष्मती । यजिष्ठम् । बर्हिः । आसदे । आ । सदे ॥१५५२॥

Samveda - Mantra Number : 1552
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 15; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने) अग्रनेता परमात्मन् ! आप (अग्निभिः) तेजों के साथ (आ याहि) आओ। (होतारम्) दाता (त्वा) आपको, हम (वृणीमहे) भजते हैं। (यजिष्ठं त्वाम्) हमारे साथ अतिशय सङ्गम करनेवाले आपको, हमारी (हविष्मती) समर्पणयुक्त (प्रयता) पवित्र प्रज्ञा (बर्हिः) हृदयासन पर (आसदे) बैठने के लिए (अनक्तु) प्रकट करे ॥१॥
Essence
परमेश्वर जब स्तोता के अन्तरात्मा में प्रबल संकल्प, उत्साह, वीरता और आशावाद की अग्नियों के साथ आता है, तब स्तोता के मार्ग से सब विघ्न हट जाते हैं और लक्ष्यप्राप्ति सुनिश्चित हो जाती है ॥१॥
Subject
प्रथम मन्त्र में परमात्मारूप अग्नि का आह्वान है।