Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1544

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- भर्गः प्रागाथः Chhand- बार्हतः प्रगाथः (विषमा बृहती, समा सतोबृहती) Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
पा꣣हि꣡ नो꣢ अग्न꣣ ए꣡क꣢या पा꣣ह्यू꣢३꣱त꣢ द्वि꣣ती꣡य꣢या । पा꣣हि꣢ गी꣣र्भि꣢स्ति꣣सृ꣡भि꣢रूर्जां पते पा꣣हि꣡ च꣢त꣣सृ꣡भि꣢र्वसो ॥१५४४॥

पा꣣हि꣢ । नः꣣ । अग्ने । ए꣡क꣢꣯या । पा꣣हि꣢ । उ꣣त꣢ । द्वि꣣ती꣡य꣢या । पा꣣हि꣢ । गी꣣र्भिः꣢ । ति꣣सृ꣡भिः꣢ । ऊ꣣र्जाम् । पते । पाहि꣢ । च꣣तसृ꣡भिः꣢ । व꣣सो ॥१५४४॥

Mantra without Swara
पाहि नो अग्न एकया पाह्यू३त द्वितीयया । पाहि गीर्भिस्तिसृभिरूर्जां पते पाहि चतसृभिर्वसो ॥

पाहि । नः । अग्ने । एकया । पाहि । उत । द्वितीयया । पाहि । गीर्भिः । तिसृभिः । ऊर्जाम् । पते । पाहि । चतसृभिः । वसो ॥१५४४॥

Samveda - Mantra Number : 1544
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 15; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने) विद्वान् आचार्य ! आप (एकया) धर्म का उपदेश करनेवाली एक वाणी से (नः) हमारी (पाहि) पालना करो, (उत) और (द्वितीयया) धर्मानुकूल धन कमाने का उपदेश करनेवाली दूसरी वाणी से (पाहि) हमारी पालना करो। हे (ऊर्जां पते) ब्रह्मबलों के अधिपति आचार्य। आप (तिसृभिः गीर्भिः) धर्म, अर्थ और काम का उपदेश करनेवाली तीन वाणियों से (पाहि) हमारी पालना करो। हे (वसो) सद्गुणों के निवासक आचार्य ! आप (चतसृभिः) धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का उपदेश करनेवाली चार वाणियों से (पाहि) हमारी पालना करो ॥१॥
Essence
आचार्य का यह कर्तव्य है कि वह शिष्यों को धर्म, धर्माविरोधि धन, धर्माविरोधि काम और मोक्ष के उपदेश से विद्वान् सदाचारी और मोक्ष का अधिकारी बनाये ॥१॥
Subject
प्रथम ऋचा पूर्वार्चिक के भाष्य में ३६ क्रमाङ्क पर परमेश्वर और विद्वान् को सम्बोधित की गयी थी। यहाँ आचार्य को कहते हैं।