Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1526

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ꣡ नो꣢ अग्ने सुचे꣣तु꣡ना꣢ र꣣यिं꣢ वि꣣श्वा꣡यु꣢पोषसम् । मा꣣र्डीकं꣡ धे꣢हि जी꣣व꣡से꣢ ॥१५२६॥

आ । नः꣣ । अग्ने । सुचेतु꣡ना꣢ । सु꣣ । चेतु꣡ना꣢ । र꣣यि꣢म् । वि꣣श्वा꣢यु꣢पोषसम् । वि꣣श्वा꣢यु꣢ । पो꣣षसम् । मार्डीक꣢म् । धे꣣हि । जीव꣢से꣢ ॥१५२६॥

Mantra without Swara
आ नो अग्ने सुचेतुना रयिं विश्वायुपोषसम् । मार्डीकं धेहि जीवसे ॥

आ । नः । अग्ने । सुचेतुना । सु । चेतुना । रयिम् । विश्वायुपोषसम् । विश्वायु । पोषसम् । मार्डीकम् । धेहि । जीवसे ॥१५२६॥

Samveda - Mantra Number : 1526
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 14; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने) अग्रनायक जगदीश्वर ! आप (नः जीवसे) हमारे जीवन के लिए (सुचेतुना) शुभ ज्ञान के साथ (विश्वायुपोषसम्) सब मनुष्यों के पोषक, (मार्डीकम्) सुखदायक (रयिम्) ऐश्वर्य को (आधेहि) प्रदान करो ॥३॥
Essence
वह ज्ञान ज्ञान नहीं है और वह धन धन नहीं है, जो दूसरों के उपकार के लिए न हो ॥३॥
Subject
आगे फिर वही विषयहै।