Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1525

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ꣡ नो꣢ अग्ने र꣣यिं꣡ भ꣢र सत्रा꣣सा꣢हं꣣ व꣡रे꣢ण्यम् । वि꣡श्वा꣢सु पृ꣣त्सु꣢ दु꣣ष्ट꣡र꣢म् ॥१५२५॥

आ꣢ । नः꣣ । अग्ने । रयि꣢म् । भ꣣र । स꣡त्रासाह꣢म् । स꣣त्रा । सा꣡ह꣢꣯म् । व꣡रे꣢꣯ण्यम् । वि꣡श्वा꣢꣯सु । पृ꣣त्सु꣢ । दु꣣ष्ट꣡र꣢म् । दुः꣣ । त꣡र꣢꣯म् ॥१५२५॥

Mantra without Swara
आ नो अग्ने रयिं भर सत्रासाहं वरेण्यम् । विश्वासु पृत्सु दुष्टरम् ॥

आ । नः । अग्ने । रयिम् । भर । सत्रासाहम् । सत्रा । साहम् । वरेण्यम् । विश्वासु । पृत्सु । दुष्टरम् । दुः । तरम् ॥१५२५॥

Samveda - Mantra Number : 1525
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 14; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने) अग्रनायक जगदीश्वर ! आप (नः) हमारे लिए (सत्रासाहम्) एक साथ अनेक विपदाओं को दूर करनेवाले, (वरेण्यम्) वरणीय, विश्वासु पृत्सु) सब सङ्ग्रामों में (दुष्टरम्) दुस्तर, अच्छेद्य (रयिम्) वीरतारूप ऐश्वर्य को (आभर) प्रदान करो ॥३॥
Essence
परमवीर परमेश्वर का ध्यान करके हम वीरगणों में अग्रगण्य होते हुए सब विपदाओं तथा सब आन्तरिक और बाह्य शत्रुओं को पराजित कर देवें ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में फिर जगदीश्वर से प्रार्थना है।