Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1491

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- प्रियमेध आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्रा꣢य꣣ गा꣡व꣢ आ꣣शि꣡रं꣢ दुदु꣣ह्रे꣢ व꣣ज्रि꣢णे꣣ म꣡धु꣢ । य꣡त्सी꣢मुपह्व꣣रे꣢ वि꣣द꣢त् ॥१४९१॥

इ꣡न्द्रा꣢꣯य । गा꣡वः꣢꣯ । आ꣣शि꣡र꣢म् । आ꣣ । शि꣡र꣢꣯म् । दु꣣दु꣢ह्रे । व꣣ज्रि꣡णे꣢ । म꣡धु꣢꣯ । यत् । सी꣣म् । उपह्वरे꣢ । उ꣣प । ह्वरे꣢ । वि꣣द꣢त् ॥१४९१॥

Mantra without Swara
इन्द्राय गाव आशिरं दुदुह्रे वज्रिणे मधु । यत्सीमुपह्वरे विदत् ॥

इन्द्राय । गावः । आशिरम् । आ । शिरम् । दुदुह्रे । वज्रिणे । मधु । यत् । सीम् । उपह्वरे । उप । ह्वरे । विदत् ॥१४९१॥

Samveda - Mantra Number : 1491
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 14; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(वज्रिणे) वीर्यवान् (इन्द्राय) जीवात्मा के लिए (गावः) मन और बुद्धि सहित इन्द्रियरूप धेनुएँ (मधु) मधुर (आशिरम्) ज्ञानरूप दूध को (दुदुह्रे) दुहती हैं, (यत्) जिस ज्ञान-दुग्ध को वह इन्द्र जीवात्मा (सीम्) सब ओर से (उपह्वरे) अपने समीप (विदत्) लाता है ॥३॥
Essence
परमात्मा ने जीवात्मा को मन, बुद्धि, इन्द्रियरूप श्रेष्ठ साधन प्रदान किये हैं, जिनसे वह सारा ज्ञान अर्जित कर सकता है ॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में यह बताया गया है कि आत्मा ज्ञान कैसे प्राप्त करता है।