Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1469

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यु꣣ञ्ज꣡न्त्य꣢स्य꣣ का꣢म्या꣣ ह꣢री꣣ वि꣡प꣢क्षसा꣣ र꣡थे꣢ । शो꣡णा꣢ धृ꣣ष्णू꣢ नृ꣣वा꣡ह꣢सा ॥१४६९॥

यु꣣ञ्ज꣡न्ति꣢ । अ꣣स्य । का꣡म्या꣢꣯ । हरी꣢꣯इ꣡ति꣢ । वि꣡प꣢꣯क्षसा । वि । प꣣क्षसा । र꣡थे꣢꣯ । शो꣡णा꣢꣯ । धृ꣣ष्णू꣡इति꣢ । नृ꣣वा꣡ह꣢सा । नृ꣣ । वा꣡ह꣢꣯सा ॥१४६९॥

Mantra without Swara
युञ्जन्त्यस्य काम्या हरी विपक्षसा रथे । शोणा धृष्णू नृवाहसा ॥

युञ्जन्ति । अस्य । काम्या । हरीइति । विपक्षसा । वि । पक्षसा । रथे । शोणा । धृष्णूइति । नृवाहसा । नृ । वाहसा ॥१४६९॥

Samveda - Mantra Number : 1469
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
प्रथम—प्राण-अपान के विषय में। विद्वान् योगी लोग (अस्य) इस इन्द्र नामक जीवात्मा के (रथे) शरीररूप रथ में (काम्या) चाहने योग्य, (विपक्षसा) प्राणक्रिया और अपानक्रिया रूप विशिष्ट पंखोंवाले, (शोणा) गतिशील, (धृष्णू) चतुर, (नृवाहसा) मनुष्य-देह को वहन करनेवाले (हरी) प्राण-अपान रूप दो घोड़ों को (युञ्जन्ति) प्राणायाम की विधि से उपयोग में लाते हैं ॥ द्वितीय—शिल्प के विषय में। शिल्पी लोग (अस्य) इस सूर्य या बिजली रूप अग्नि के (काम्या) कमनीय, (विपक्षसा) परस्पर विरुद्ध गुणवाले, (शोणा) गतिशील, (धृष्णू) घर्षणशील, (नृवाहसा) मनुष्यों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जानेवाले (हरी) ऋणात्मक विद्युत् तथा धनात्मक विद्युत् रूप दो घोड़ों को (युञ्जन्ति) भूयान, जलयान तथा विमानों में जोड़ते हैं ॥२॥
Essence
जैसे प्राणायाम का अभ्यास करनेवाले विद्वान् लोग प्राण-अपान रूप घोड़ों को नियुक्त करके शरीर-रथ को चलाते हैं,वैसे ही शिल्पी लोग ऋण और धन विद्युत् को यान आदि तथा घर आदि में लगाकर यात्रा और प्रकाश किया करें ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में दो हरियों का रथ में जोड़ना वर्णित है।