Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1464

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- शतं वैखानसाः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣢ग्न꣣ आ꣡यू꣢ꣳषि पवस꣣ आ꣢ सु꣣वो꣢र्ज꣣मि꣡षं꣢ च नः । आ꣣रे꣡ बा꣢धस्व दु꣣च्छु꣡ना꣢म् ॥१४६४॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । आ꣡यू꣢꣯ꣳषि । प꣣वसे । आ꣢ । सु꣣व । ऊ꣡र्ज꣢꣯म् । इ꣡ष꣢꣯म् । च꣣ । नः । आरे꣢ । बा꣣धस्व । दुच्छुना꣡म्꣢ ॥१४६४॥

Mantra without Swara
अग्न आयूꣳषि पवस आ सुवोर्जमिषं च नः । आरे बाधस्व दुच्छुनाम् ॥

अग्ने । आयूꣳषि । पवसे । आ । सुव । ऊर्जम् । इषम् । च । नः । आरे । बाधस्व । दुच्छुनाम् ॥१४६४॥

Samveda - Mantra Number : 1464
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने) चरित्र को ऊँचा उठानेवाले आचार्यवर ! आप शिष्यों के (आयूंषि) जीवनों को (पवसे) पवित्र करते हो। (नः) हम शिष्यों के लिए (ऊर्जम्) आत्मबल वा चरित्र-बल, (इषं च) और अभीष्ट विद्या (आसुव) प्रदान करो। (दुच्छुनाम्) दुर्गति करनेवाली अविद्या को (आरे) दूर (बाधस्व) बाधित कर दो ॥३॥
Essence
श्रेष्ठ आचार्य को प्राप्त कर विद्यार्थी पवित्रात्मा और विद्वान् होकर समावर्तन के अनन्तर घर आकर राष्ट्र को उन्नत करें ॥३॥
Subject
तृतीय ऋचा पूर्वार्चिक में ६२७ क्रमाङ्क पर परमात्मा और विद्वान् राजा को सम्बोधित की गयी थी। यहाँ आचार्य को कहते हैं।