Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1460

1875 Mantra
Devata- सरस्वान् Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ज꣣नी꣢यन्तो꣣ न्व꣡ग्र꣢वः पुत्री꣣य꣡न्तः꣢ सु꣣दा꣡न꣢वः । स꣡र꣢स्वन्तꣳ हवामहे ॥१४६०॥

ज꣣नीय꣡न्तः꣢ । नु । अ꣡ग्र꣢꣯वः । पु꣣त्रीय꣡न्तः꣢ । पु꣣त् । त्रीय꣡न्तः꣢ । सु꣣दा꣢न꣢वः । सु꣣ । दा꣡न꣢꣯वः । स꣡र꣢꣯स्वन्तम् । ह꣣वामहे ॥१४६०॥

Mantra without Swara
जनीयन्तो न्वग्रवः पुत्रीयन्तः सुदानवः । सरस्वन्तꣳ हवामहे ॥

जनीयन्तः । नु । अग्रवः । पुत्रीयन्तः । पुत् । त्रीयन्तः । सुदानवः । सु । दानवः । सरस्वन्तम् । हवामहे ॥१४६०॥

Samveda - Mantra Number : 1460
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(अग्रवः) पुरुषार्थी, (जनीयन्तः) पत्नी को चाहनेवाले, (पुत्रीयन्तः) पुत्र-पुत्री को चाहनेवाले, (सुदानवः) उत्कृष्ट दान करनेवाले हम गृहस्थ लोग (सरस्वन्तम्) आनन्दरसमय परमात्मा को (नु) शीघ्र ही (हवामहे)पुकारते हैं ॥१॥
Essence
ब्रह्मचारी लोग स्नातक होकर विदुषी, सच्चरित्र, गुणवती कन्या से विवाह करके, प्रशस्त सन्तान उत्पन्न करके, पञ्चमहायज्ञ आदि गृहस्थ के कर्तव्यों का पालन करते हुए परमात्मा की उपासना करें ॥१॥
Subject
प्रथम मन्त्र में गृहस्थ के कर्तव्य के रूप में परमात्मा की पूजा का वर्णन है।