Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1449

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢मान सु꣣वी꣡र्य꣢ꣳ र꣣यि꣡ꣳ सो꣢म रिरीहि णः । इ꣢न्द꣣वि꣡न्द्रे꣢ण नो यु꣣जा꣢ ॥१४४९॥

प꣡व꣢꣯मान । सु꣣वी꣡र्य꣢म् । सु꣣ । वी꣡र्य꣢꣯म् । र꣣यि꣢म् । सो꣣म । रिरीहि । नः । इ꣡न्दो꣢꣯ । इ꣡न्द्रे꣢꣯ण । नः꣣ । युजा꣢ ॥१४४९॥

Mantra without Swara
पवमान सुवीर्यꣳ रयिꣳ सोम रिरीहि णः । इन्दविन्द्रेण नो युजा ॥

पवमान । सुवीर्यम् । सु । वीर्यम् । रयिम् । सोम । रिरीहि । नः । इन्दो । इन्द्रेण । नः । युजा ॥१४४९॥

Samveda - Mantra Number : 1449
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (पवमान) पवित्रतादायक, (इन्दो) रस से सराबोर करनेवाले (सोम) आनन्द-रस के भण्डार जगदीश ! आप (नः युजा) हमारे सहायक (इन्द्रेण) मन द्वारा (नः) हमारे लिए (सुवीर्यम्) श्रेष्ठ वीरता से युक्त (रयिम्) ऐश्वर्य (रिरीहि) प्राप्त कराओ ॥६॥
Essence
परमात्मा, जीवात्मा और मन की मित्रता से ही मनुष्य चरम उन्नति करने में समर्थ होता है ॥६॥
Subject
अगले मन्त्र में परमात्मा से प्रार्थना की गयी है।