Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1439

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कविर्भार्गवः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢मानो असिष्यद꣣द्र꣡क्षा꣢ꣳस्यप꣣ज꣡ङ्घ꣢नत् । प्र꣣त्नव꣢द्रो꣣च꣢य꣣न्रु꣡चः꣢ ॥१४३९॥

प꣡व꣢꣯मानः । अ꣣सिष्यदत् । र꣡क्षा꣢꣯ꣳसि । अ꣣पज꣡ङ्घ꣢नत् । अ꣣प । ज꣡ङ्घ꣢꣯नत् । प्र꣣त्नव꣢त् । रो꣣च꣡यन् । रु꣡चः꣢꣯ ॥१४३९॥

Mantra without Swara
पवमानो असिष्यदद्रक्षाꣳस्यपजङ्घनत् । प्रत्नवद्रोचयन्रुचः ॥

पवमानः । असिष्यदत् । रक्षाꣳसि । अपजङ्घनत् । अप । जङ्घनत् । प्रत्नवत् । रोचयन् । रुचः ॥१४३९॥

Samveda - Mantra Number : 1439
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(पवमानः) पवित्रतादायक आनन्दवर्षी जगदीश्वर (रक्षांसि) काम, क्रोध आदि रिपुओं को और पापों को (अपजङ्घनत्) नष्ट करता हुआ (प्रत्नवत्) पुरातन अग्नि के समान (रुचः) तेजों को (रोचयन्) प्रदीप्त करता हुआ (असिष्यदत्) बह रहा है ॥५॥ यहाँ उपमालङ्कार है ॥५॥
Essence
परमेश्वर की कृपा से उपासक के अन्तःकरण से वासनाएँ क्षीण हो जाती हैं, तेज दमकते हैं और हृदय कालिमा से रहित पवित्र हो जाता है ॥५॥
Subject
अगले मन्त्र में यह वर्णन है कि उपासना किया हुआ जगदीश्वर क्या करता है।