Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1420

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- नोधा गौतमः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
उ꣣त꣡ प्र पि꣢꣯प्य꣣ ऊ꣢ध꣣र꣡घ्न्या꣢या꣣ इ꣢न्दु꣣र्धा꣡रा꣢भिः सचते सुमे꣣धाः꣢ । मू꣣र्धा꣢नं꣣ गा꣢वः꣣ प꣡य꣢सा च꣣मू꣢ष्व꣣भि꣡ श्री꣢णन्ति꣣ व꣡सु꣢भि꣣र्न꣢ नि꣣क्तैः꣢ ॥१४२०॥

उ꣣त꣢ । प्र । पि꣣प्ये । ऊ꣡धः꣢꣯ । अ꣡घ्न्या꣢꣯याः । अ । घ्न्या꣣याः । इ꣡न्दुः꣢꣯ । धा꣡रा꣢꣯भिः । स꣣चते । सुमेधाः꣢ । सु꣣ । मेधाः꣢ । मू꣣र्धा꣡न꣢म् । गा꣡वः꣢꣯ । प꣡य꣢꣯सा । च꣣मू꣡षु꣢ । अ꣣भि꣡ । श्री꣡णन्ति । व꣡सु꣢꣯भिः । न । नि꣣क्तैः꣢ ॥१४२०॥

Mantra without Swara
उत प्र पिप्य ऊधरघ्न्याया इन्दुर्धाराभिः सचते सुमेधाः । मूर्धानं गावः पयसा चमूष्वभि श्रीणन्ति वसुभिर्न निक्तैः ॥

उत । प्र । पिप्ये । ऊधः । अघ्न्यायाः । अ । घ्न्यायाः । इन्दुः । धाराभिः । सचते । सुमेधाः । सु । मेधाः । मूर्धानम् । गावः । पयसा । चमूषु । अभि । श्रीणन्ति । वसुभिः । न । निक्तैः ॥१४२०॥

Samveda - Mantra Number : 1420
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 12; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(उत) और, जीवात्मा-रूपी बछड़े को देखकर (अघ्न्यायाः) जगन्मातारूपिणी दुधारू गाय का (ऊधः) उधस् (प्र पिप्ये) आनन्दरूप दूध से जब बढ़ जाता है, तब (सुमेधाः) उत्कृष्ट मेधावाला (इन्दुः) जीवात्मा-रूपी बछड़ा (धाराभिः) आनन्द की धारों से (सचते) संयुक्त हो जाता है। (गावः) ज्ञानेन्द्रिय-रूप गौएँ (पयसा) ज्ञानरूप दूध से (मूर्धानम्) शरीर के प्रधान जीवात्मा को (चमूषु) प्राण-रूप पतीलों में (अभि श्रीणन्ति) परिपक्व करती हैं, (न) जैसे (निक्तैः) शुद्ध (वसुभिः) सूर्यकिरणों से फल आदि पकते हैं ॥३॥ यहाँ उपमा और निगरणरूप अतिशयोक्ति अलङ्कार है ॥३॥
Essence
जैसे बछड़ा अपनी माँ गाय का दूध पीता है, वैसे ही उपासक जगन्माता के आनन्द-रस का पान करता है ॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में उपासक की आनन्द-प्राप्ति का वर्णन है।