Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1419

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- नोधा गौतमः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
सं꣢ मा꣣तृ꣢भि꣣र्न꣡ शिशु꣢꣯र्वावशा꣣नो꣡ वृषा꣢꣯ दधन्वे पुरु꣣वा꣡रो꣢ अ꣣द्भिः꣢ । म꣢र्यो꣣ न꣡ योषा꣢꣯म꣣भि꣡ नि꣢ष्कृ꣣तं꣡ यन्त्सं ग꣢꣯च्छते क꣣ल꣡श꣢ उ꣣स्रि꣡या꣢भिः ॥१४१९॥

स꣢म् । मा꣣तृ꣡भिः꣢ । न । शि꣡शुः꣢꣯ । वा꣣वशानः꣢ । वृ꣡षा꣢꣯ । द꣣धन्वे । पुरुवा꣡रः꣢ । पु꣣रु । वा꣡रः꣢꣯ । अ꣣द्भिः꣢ । म꣡र्यः꣢꣯ । न । यो꣡षा꣢꣯म् । अ꣣भि꣢ । नि꣣ष्कृत꣢म् । निः꣣ । कृत꣢म् । यन् । सम् । ग꣣च्छते । कल꣡शे꣢ । उ꣣स्रि꣡या꣢भिः । उ꣣ । स्रि꣡या꣢꣯भिः ॥१४१९॥

Mantra without Swara
सं मातृभिर्न शिशुर्वावशानो वृषा दधन्वे पुरुवारो अद्भिः । मर्यो न योषामभि निष्कृतं यन्त्सं गच्छते कलश उस्रियाभिः ॥

सम् । मातृभिः । न । शिशुः । वावशानः । वृषा । दधन्वे । पुरुवारः । पुरु । वारः । अद्भिः । मर्यः । न । योषाम् । अभि । निष्कृतम् । निः । कृतम् । यन् । सम् । गच्छते । कलशे । उस्रियाभिः । उ । स्रियाभिः ॥१४१९॥

Samveda - Mantra Number : 1419
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 12; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(वावशानः) माँ को चाहता हुआ (शिशुः) शिशु (मातृभिः न) जैसे माताओं से धारण किया जाता है, वैसे ही (वावशानः) परमात्मा को चाहता हुआ, (वृषा) उसे अपने प्रेम से सींचनेवाला, (पुरुवारः) बहुत-से सद्गुणों को वरनेवाला सोम जीवात्मा (अद्भिः) परमात्मा के पास से आयी हुई आनन्द-धाराओं से (सं दधन्वे) भली-भाँति धारण किया जाता है और (मर्यः न) मर्त्य पुरुष जैसे (योषाम् अभि) पत्नी के प्रति प्रेम से जाता है, वैसे ही (निष्कृतम् अभि) श्रेष्ठ गुण-कर्म-स्वभावों से अलङ्कृत परमात्मा के प्रति (यन्) जाता हुआ वह (कलशे) आनन्द की कलाओं से परिपूर्ण मोक्षधाम में (संगच्छते) सङ्गत हो जाता है ॥२॥ यहाँ उपमालङ्कार है ॥२॥
Essence
परमात्मा के प्रति उत्कट प्रेम और उत्कट श्रद्धा उसकी प्राप्ति में बड़े कारण बनते हैं ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में फिर परमात्मा की प्राप्ति का विषय है।