Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1381

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣢ नो꣣ वे꣡दो꣢ अ꣣मा꣡त्य꣢म꣣ग्नी꣡ र꣢क्षतु꣣ श꣡न्त꣢मः । उ꣣ता꣢꣫स्मान्पा꣣त्व꣡ꣳह꣢सः ॥१३८१॥

सः । नः꣣ । वे꣡दः꣢꣯ । अ꣣मा꣡त्य꣢म् । अ꣣ग्निः꣢ । र꣣क्षतु । श꣡न्त꣢꣯मः । उ꣣त꣢ । अ꣣स्मा꣢न् । पा꣣तु । अ꣡ꣳह꣢꣯सः ॥१३८१॥

Mantra without Swara
स नो वेदो अमात्यमग्नी रक्षतु शन्तमः । उतास्मान्पात्वꣳहसः ॥

सः । नः । वेदः । अमात्यम् । अग्निः । रक्षतु । शन्तमः । उत । अस्मान् । पातु । अꣳहसः ॥१३८१॥

Samveda - Mantra Number : 1381
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 12; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(सः) वह (शन्तमः) अतिशय शान्तिदायक (अग्निः) अग्रनायक परमेश्वर (नः) हमारे (अमात्यम्) साथ रहनेवाले (वेदः) ज्ञान की वा दिव्य धन की (रक्षतु) रक्षा करे (उत) और (अहंसः) पाप से (नः) हमें (पातु) बचाये ॥३॥
Essence
परमात्मा में विश्वास से दिव्य गुण रक्षित होते हैं और पाप नष्ट हो जाते हैं ॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में उपासक अपनी आकाङ्क्षा प्रकट कर रहा है।