Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1362

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेध्यातिथिः काण्वः Chhand- बार्हतः प्रगाथः (विषमा बृहती, समा सतोबृहती) Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
उ꣢दु꣣ त्ये꣡ मधु꣢꣯मत्तमा꣣ गि꣢रः꣣ स्तो꣡मा꣢स ईरते । स꣣त्राजि꣡तो꣢ धन꣣सा꣡ अक्षि꣢꣯तोतयो वाज꣣य꣢न्तो꣣ र꣡था꣢ इव ॥१३६२॥

उ꣢त् । उ꣣ । त्ये꣢ । म꣡धु꣢꣯मत्तमाः । गि꣡रः꣢꣯ । स्तो꣡मा꣢꣯सः । ई꣣रते । सत्राजि꣡तः꣢ । स꣣त्रा । जि꣡तः꣢꣯ । ध꣣नसाः꣢ । ध꣣न । साः꣢ । अ꣡क्षि꣢꣯तोतयः । अ꣡क्षि꣢꣯त । ऊ꣣तयः । वाजय꣡न्तः꣢ । र꣡था꣢꣯ । इ꣣व ॥१३६२॥

Mantra without Swara
उदु त्ये मधुमत्तमा गिरः स्तोमास ईरते । सत्राजितो धनसा अक्षितोतयो वाजयन्तो रथा इव ॥

उत् । उ । त्ये । मधुमत्तमाः । गिरः । स्तोमासः । ईरते । सत्राजितः । सत्रा । जितः । धनसाः । धन । साः । अक्षितोतयः । अक्षित । ऊतयः । वाजयन्तः । रथा । इव ॥१३६२॥

Samveda - Mantra Number : 1362
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 11; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(सत्राजितः) सत्य को जीतनेवाले, (धनसाः) भौतिक और आध्यात्मिक धन की प्राप्ति तथा दान करनेवाले (त्ये) वे (मधुमत्तमाः) अतिशय मधुर व्यवहारवाले, (स्तोमासः) स्तोता (गिरः) विद्वान् लोग (रथाः इव) विमान यानों के समान (उदीरते उ) उपर जाते हैं अर्थात् उद्यमी होते हैं ॥१॥ यहाँ उपमालङ्कार है ॥१॥
Essence
परमात्मा के उपासक मन, वाणी और कर्म से सच्चे, परोपकारी, मधुर, बलवान् और पुरुषार्थी होकर अपनी और दूसरों की उन्नति करते हैं ॥१॥
Subject
प्रथम ऋचा की व्याख्या पूर्वार्चिक में २५१ क्रमाङ्क पर स्तोत्रों के विषय में की गयी थी। यहाँ स्तोताओं का विषय वर्णित है।