Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1350

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡ग्ने꣢ सु꣣ख꣡त꣢मे꣣ र꣡थे꣢ दे꣣वा꣡ꣳ ई꣢डि꣣त꣡ आ व꣢꣯ह । अ꣢सि꣣ हो꣢ता꣣ म꣡नु꣢र्हितः ॥१३५०॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । सु꣣ख꣡त꣢मे । सु꣣ । ख꣡त꣢꣯मे । र꣡थे꣢꣯ । दे꣣वा꣢न् । ई꣣डितः꣢ । आ । व꣣ह । अ꣡सि꣢꣯ । हो꣡ता꣢꣯ । म꣡नु꣢꣯र्हितः । म꣡नुः꣢꣯ । हि꣡तः ॥१३५०॥

Mantra without Swara
अग्ने सुखतमे रथे देवाꣳ ईडित आ वह । असि होता मनुर्हितः ॥

अग्ने । सुखतमे । सु । खतमे । रथे । देवान् । ईडितः । आ । वह । असि । होता । मनुर्हितः । मनुः । हितः ॥१३५०॥

Samveda - Mantra Number : 1350
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 11; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने) अग्रनायक परमात्मन् ! (ईडितः) पूजा किये हुए, आप (देवान्) दिव्यगुणयुक्त हम विद्वान् उपासकों को, आगामी जन्म में (सुखतमे) सबसे अधिक सुखदायी (रथे) मानवदेह-रूप रथ में (आ वह) जीवनयात्रा कराओ। आप (होता) कर्मफलों के दाता और (मनुर्हितः) मनुष्यों के लिए हितकारी (असि) हो ॥४॥
Essence
परमेश्वर की उपासना से श्रेष्ठ कर्मों में प्रेरित हुआ मनुष्य आगामी जन्म में भी कर्मों के अनुसार मानव-योनि प्राप्त करता है ॥४॥
Subject
अब परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं।