Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1340

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- त्रिशोकः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡यु꣢द्ध꣣ इ꣢द्यु꣣धा꣢꣫ वृत꣣ꣳ शू꣢र꣣ आ꣡ज꣢ति꣣ स꣡त्व꣢भिः । ये꣢षा꣣मि꣢न्द्रो꣣ यु꣢वा꣣ स꣡खा꣢ ॥१३४०॥

अ꣡यु꣢꣯द्ध । अ । यु꣣द्ध । इ꣢त् । यु꣣धा꣢ । वृ꣡त꣢꣯म् । शू꣡रः꣢꣯ । आ । अ꣣जति । स꣡त्व꣢꣯भिः । ये꣡षा꣢꣯म् । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । यु꣡वा꣢꣯ । स꣡खा꣢꣯ । स । खा꣣ ॥१३४०॥

Mantra without Swara
अयुद्ध इद्युधा वृतꣳ शूर आजति सत्वभिः । येषामिन्द्रो युवा सखा ॥

अयुद्ध । अ । युद्ध । इत् । युधा । वृतम् । शूरः । आ । अजति । सत्वभिः । येषाम् । इन्द्रः । युवा । सखा । स । खा ॥१३४०॥

Samveda - Mantra Number : 1340
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 12;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(येषाम्) जिन लोगों का (युवा) युवा (इन्द्रः) वीर परमेश्वर वा वीर राजा (सखा) सहायक हो जाता है, उनका (शूरः) शूर जीवात्मा वा शूर सेनापति (अयुद्धः इत्) स्वयं दूसरों से युद्ध न किये जा सकनेवाला होकर (युधा) देवासुरसङ्ग्राम से (वृतम्) घिरे हुए काम-क्रोध आदि षड् रिपुवर्ग को वा मानव-शत्रुदल को (सत्वभिः) अपने पराक्रमों से (आ अजति) मार कर दूर फेंक देता है ॥३॥
Essence
जैसे जगदीश्वर को सखा वरण करके योगसाधक लोग योगमार्ग में आये हुए सब विघ्नों का निवारण कर देते हैं, वैसे ही वीर मनुष्य को राजा वा सेनापति के पद पर अभिषिक्त करके प्रजाजन सब शत्रुओं को विनष्ट कर देते हैं ॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में भी उसी विषय का वर्णन है।