Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1323

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त्व꣡ꣳ सो꣢मासि धार꣣यु꣢र्म꣣न्द्र꣡ ओजि꣢꣯ष्ठो अध्व꣣रे꣢ । प꣡व꣢स्व मꣳह꣣य꣡द्र꣢यिः ॥१३२३॥

त्व꣢म् । सो꣣म । असि । धारयुः꣢ । म꣣न्द्रः꣢ । ओ꣡जि꣢꣯ष्ठः । अ꣣ध्वरे꣢ । प꣡व꣢꣯स्व । म꣣ꣳहय꣡द्र꣢यिः । म꣣ꣳहय꣢त् । र꣣यिः ॥१३२३॥

Mantra without Swara
त्वꣳ सोमासि धारयुर्मन्द्र ओजिष्ठो अध्वरे । पवस्व मꣳहयद्रयिः ॥

त्वम् । सोम । असि । धारयुः । मन्द्रः । ओजिष्ठः । अध्वरे । पवस्व । मꣳहयद्रयिः । मꣳहयत् । रयिः ॥१३२३॥

Samveda - Mantra Number : 1323
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 11;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (सोम) जगत् के रचयिता रसनिधि परमात्मन् ! (त्वम्) आप (धारयुः) आनन्द-धाराओं को देने के इच्छुक, (मन्द्रः) तृप्त करनेवाले और (ओजिष्ठः) सबसे अधिक ओजस्वी (असि) हो। (मंहयद्रयिः) जिनका धन वृद्धि प्रदान करनेवाला वा कीर्ति देनेवाला है, ऐसे आप (अध्वरे) जीवन-यज्ञ में (पवस्व) हमें पवित्र करते हो ॥१॥
Essence
सब मनुष्य परमात्मा की आराधना करके पुण्य, धन, आनन्द और सन्तुष्टि को अपने जीवन में प्राप्त करें ॥१॥
Subject
प्रथम मन्त्र में परमेश्वर के गुणों का वर्णन करके उससे प्रार्थना की गयी है।