Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

Samveda Mantra 1311

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- शतं वैखानसाः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣣व꣢मानो र꣣थी꣡त꣢मः शु꣣भ्रे꣡भिः꣢ शु꣣भ्र꣡श꣢स्तमः । ह꣡रि꣢श्चन्द्रो म꣣रु꣡द्ग꣢णः ॥१३११॥

प꣡व꣢꣯मानः । र꣣थी꣡त꣢मः । शु꣣भ्रे꣡भिः꣢ । शु꣣भ्र꣡श꣢स्तमः । शु꣣भ्र꣢ । श꣣स्तमः । ह꣡रि꣢꣯श्चन्द्रः । ह꣡रि꣢꣯ । च꣣न्द्रः । मरु꣡द्ग꣢णः । म꣣रु꣢त् । ग꣣णः ॥१३११॥

Mantra without Swara
पवमानो रथीतमः शुभ्रेभिः शुभ्रशस्तमः । हरिश्चन्द्रो मरुद्गणः ॥

पवमानः । रथीतमः । शुभ्रेभिः । शुभ्रशस्तमः । शुभ्र । शस्तमः । हरिश्चन्द्रः । हरि । चन्द्रः । मरुद्गणः । मरुत् । गणः ॥१३११॥

Samveda - Mantra Number : 1311
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 9;

Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Acharya Ramnath Vedalankar) - हिन्दी
Meaning
(पवमानः) पवित्रकर्ता जगत्स्रष्टा परमेश्वर (रथीतमः) रथियों में श्रेष्ठ, (शुभ्रेभिः) शुभ्र गुण-कर्मों से (शुभ्रशस्तमः) अतिशय निर्मल यशवाला, (हरिश्चन्द्रः) मनोहर आह्लाद देनेवाला और (मरुद्गणः) प्राण-रूप या पवन-रूप गणोंवाला है ॥२॥
Essence
सूर्य, चाँद, पवन, बिजली आदि और मानव-शरीर जिसके बनाये हुए रथ हैं, ऐसे अत्यन्त यशस्वी, परमानन्ददायक, प्राण आदि को चलानेवाले परमेश्वर का ज्ञान सबको पाना चाहिए ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में परमात्मा के गुणों का वर्णन है।